
इन युवा धड़कनों में समा गया देश प्रेम, रग-रग में सेवा-सुरक्षा का जज्बा
भुवनेश पण्ड्या
र्उदयपुर. उन्होंने जब पहली बार वर्दी पहनी तो वो मन से समर्पित हो ही गए थे। चाहे एनसीसी के किसी विंग का ड्रेस हो या देश सेवा की उस पंक्ति तक पहुंचने के लिए कोई और राह। ये मेवाड़ के वे युवा चेहरे हैं जिन्होंने देश सेवा में जाने के लिए खुद पहल की तो विद्यार्थी जीवन से ही वे इस राह चल पड़े। आइए जानते है ऐसे युवाओं के बारे में कि आखिर वे कैसे सेना में जाकर खुद को गर्वित अनुभव करते हैं। इस गणतंत्र पर विशेष खबर ।
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चाह जागी तो दौड़ पड़े सेना की ओरसरबजीत सिंह: कम्प्यूटर साइंस से एमएसी कर चुके सरबजीत ने जब एनसीसी ज्वाइन की तो ऐसा लगा कि सब काम छोड़ कर वे सीधे देश सेवा को समॢपत हो जाएंगे। 2012 में एनसीसी में प्रवेश लिया। इसके बाद वे एनसीसी से जुड़े रहे। पढ़ाई के साथ-साथ उनके मन से सीमा तक पहुंचने की चाह हुई। भले ही उन्होंने आईटी कॉरपोरेशन में अच्छे वेतन में काम किया, लेकिन ये उनकी आखिरी मंजिल नहीं थी। वे चल पडे फौज की राह। आखिर तमाम कोशिशों ने उन्हें पहुंचा ही दिया देश की सेना तक। सरबजीत उदयपुर के साइंस कॉलेज के विद्यार्थी रहे, उन्होंने यहां एयरविंग में प्रवेश लिया तो फ्लाइंग ऑफिसर देवेन्द्रसिंह के साथ इस विंग में जुड़े रहे। अब वे पठानकोट की सिख रेजिमेंट में पोस्टेड हैं। महज 25 वर्ष की उम्र में सरबजीत ने अपनी मंजिल पा ली है।
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फीते से होता है जिम्मेदारी का अहसासचुनौती शर्मा: चुनौती का हाल में नवम्बर, 2019 में इंडियन कोस्ट गार्ड आईएनएस शिवाजी लुनावला में पोस्टिंग हुई है। पत्रिका से बातचीत करते हुए चुनौती ने कहा कि जब वे नेवल की डे्रस पहनती है, जब वे अपने कांधे पर फीते लगाती है, तो उन्हें अपनी जिम्मेदारी का अहसास होता है। उदयपुर में सेक्टर नौ की निवासी चुनौती ने भूपाल नोबल्स से बीएससी किया है। वह एनसीसी में 2015 में 2018 जुड़ी रही। राजस्थान की बेस्ट कैडेट भी चुनी गई। राजस्थान का प्रतिनिधित्व उन्होंने दिल्ली में किया। फिलहाल वे इंडियन नेवल में काम कर बेहद खुश है। एनसीसी आर्मी विंग से किया लेकिन वे नेवी में काम करने का मन में ठान बैठी थी। कैप्टन अनिता राठौड़, मेजर अदीति और कर्नल एमएस राठौड़ ने मुझे यहां तक पहुंचने में काफी प्रेरित किया। परिवार का पूरा सपोर्ट शुरू से अब तक मिलता रहा।
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माइनस 20 डिग्री की मार सहते हैं लेकिन मन में बसा है देश निखिल देवड़ा: वे सिरोही जिले के विरोली गांव के है। बकौल निखिल इस गांव में 30 से ज्यादा सैनिक है। बचपन से ही उन्हें देखा तो सेना में आने की इच्छा जाग गई थी। दादा का भी सेना में होना उनकी सेना में जाने की पहली सीढ़ी थी। फिलहाल कश्मीर में पोस्टेड है। उन्होंने बताया कि यहां ज्यादातर समय मौसम बेहद सर्द रहता है। माइनस 15 से 20 डिग्री सेल्सियस सामान्य बात है। निखिल ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि उन्हें कश्मीर में चार माह से हो गए। वे एनसीसी में 2014 से 2017 तक जुड़े रहे। मूलत: सिरोही के हैं, लेकिन उदयपुर के सेक्टर 14 में परिवार के सदस्य रहते हैं। 22 वर्षीय निखिल ने बताया कि वे और उनके साथी बर्फ पिघला कर पानी पीते हैं, खाना पीना भी मुश्किल से पूरा होता है। सेना की ओर से तमाम व्यवस्थाएं रहती है, लेकिन यहां की लोकेशन के कारण ये स्थिति रहती है। उनके लिए एक भी दिन ऐसा नही रहता जब गोलाबारी या फायरिंग से रूबरू ना हो। उनके पिता और लेफ्टिनेंट जीएस राठौड़ ने उन्हें यहां तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया। एमबी आट्र्स कॉलेज से इंग्लिश में ग्रेजुएशन किया।
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ये भी पहुंचे सेना तक - हरिराम गुर्जर- इंडियन आर्मी - बाबूलाल चौधरी- इंडियन एयरफोर्स
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बीएन कॉलेज से ये युवा पहुंचे सेना में- कुल 21 युवाओं ने बनाया सेना को अपना भविष्य - शुभम जैन- करणीप्रतापसिंह- तपेन्द्र चौधरी - चंदनसिंह- नरेन्द्रसिंह चौहान - पुष्पेन्द्रसिंह सोलंकी - पुष्पेन्द्रसिंह चौहान - बाबुलाल मीणा - रणवीरसिंह झाला-----ये पहुंचे पुलिस में - पुष्पेन्द्रसिंह झाला- बसन्तीलाल मीणा
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देश प्रेम वाकई प्रेरणादायी युवाओं का इस तरह से देश प्रेम वाकई प्रेरणादायी है। युवा ही देश की पहचान हैं। एनसीसी जैसे प्लेटफार्म से ये युवा आगे बढ़े हैं। वे अन्य युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। आगे आने वाले युवा भी एनसीसी की सभी विंग के जरिए या अन्य परीक्षाओं के माध्यम से यदि देश सेवा में जाते हैं तो ये पूरी दुनिया में अपना नाम करने जैसा है।
एएस राठौड़, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी उदयपुर
Published on:
01 Feb 2020 10:52 pm
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