
लगातार गिरती स्वच्छता रैंकिंग व बिगड़ी सफाई व्यवस्था को लेकर शनिवार को नगर निगम के उपमहापौर पारस सिंघवी सवालों के घेरे में थे। राजस्थान पत्रिका कार्यालय में Òटी-टॉकÓ के दौरान उदयपुर संस्करण के संपादक अभिषेक श्रीवास्तव ने उनसे सवाल किए तो उन्होंने कमियों को स्वीकारा और सख्ती, समझाइश, प्रोत्साहन एवं नवाचार के जरिए इस बार की रैंकिंग में सुधार का दावा किया। सिंघवी ने विभागों में तालमेल के अभाव व जनता में जागरूकता की कमी को गिरती रैंकिंग के लिए जिम्मेदार ठहराया। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश ....
सवाल : सफाई में इंदौर अपने आप को मेेंटेन किए हुए हैं, उदयपुर क्यों पिछड़ रहा है ?
जवाब : नगर निगम के पास 70 वार्ड हैं, लेकिन 30 फीसदी हिस्सा यूडीए के पास है। निगम अपने वार्डों में सफाई करवा रहा है लेकिन यूडीए के क्षेत्र में पिछड़ रहा है। हमने यूडीए को कई बार पत्र लिखे कि समस्त वार्ड हमें दे दो, उनमें खाली भूखंड होंगे तो हम विकसित करेंगे, हम बेचेंगे। उन्होंने आज तक वार्ड नहीं दिए। उन वार्डों में हमारे पार्षद है, इस कारण हमने वहां सफाई कार्मिक लगा रखे हैं, लेकिन वे अपर्याप्त है। अभी यूडीए ने दो जोन में ठेके कर रखे हैं, लेकिन हम ठेकेदार के काम से संतुष्ट नहीं। हमने कहा ठेकेदार के बिल में कटौती करो, वो नहीं कर रहे। ठेकेदार 45 की जगह 25 से लोगों से काम चला रहा है।
सवाल : रैंकिंग में हम कहां पिछड़ रहे हैं ?
जवाब : हमारी रैंकिंग सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट में सही काम नहीं होने से पिछड़ी। रैंकिंग में सिर्फ सफाई ही नहीं देखी जाती बल्कि डोर-टू-डोर कलेक्शन, कचरा निस्तारण व उसका उपयोग, ओडीएफ के अलावा पब्लिक फीडबैक भी शामिल है। हमने झीलों की सफाई में सौ फीसदी अंक प्राप्त किए, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण में 85 व सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट में 0 अंक मिला। इस बार आयुक्त से कहा कि आप कचरा निस्तारण पर ध्यान दें, सफाई पर हम फोकस कर लेंगे। पब्लिक फीडबैक के लिए हमें निगम, यूडीए व पंचायत सभी क्षेत्रों में फोकस करना होगा। इसके लिए सभी विभागों में तालमेल बिठाकर सख्ती के साथ काम करना होगा।
सवाल : सफाई में कहां-कहां कमियां आ रही हैं ?
जवाब : यूडीए व पंचायत क्षेत्र में बड़े-बड़े कॉॅम्पलेक्स बना दिए गए, वहां कचरा उठ नहीं रहा, लोग ऊंचाई से सीधा कचरा सडक़ों पर फेंक रहे हैं। शहर में दस से अधिक शौचालय बनने थे, लेकिन वे बन नहीं पाए। रेलवे स्टेशन के सामने कच्ची बस्ती को अतिक्रमण मानकर सुविधा नहीं दे रखी, इसके अभाव में खुले में शौच कर रहे हैं, ऐसी जगह का निराकरण नहीं हो पा रहा।
सवाल : इंदौर ने सफाई को संस्कार बनाया, यहां विभाग ही एक जाजम पर नहीं है ?
जवाब : हां, यह सही है, इंदौर में सभी विभाग मिलकर काम करते हैं, हमारे यहां तो निगम में आपसी समन्वय के लिए बनी कमेटियां ही साथ नहीं है। यहां जेसीबी खराब होती है तो छह दिन बाद आती है। डंपर, लोडर, टेम्पो व्यवस्थित रूप से नहीं आता। इसके अलावा यूडीए, निगम, पंचायत, पीडब्ल्यूडी को भी साथ रखना होगा। सभी विभागीय अधिकारी साथ बैठ जाएंगें तो साफ सफाई के साथ ही अन्य कामों में भी तालमेल रहेगा।
सवाल : इंदौर में लोग पुलिस से ज्यादा Òपीली गैंगÓ से डरते हैं, यहां क्यों नहीं ?
जवाब : यह सही है, लेकिन इतने सालों में पहली बार यहां भी लोगों में निगम का भय हुआ है। इसी कारण देहलीगेट पर एक साथ 45 दुकानें सीज कर पाए। बोहरा गणेशजी के पास अतिक्रमण हटा सके। जहां भी जानकारी मिल रही है, नोटिस भेजकर पंचनामा बनाया जा रहा है, जिससे डर पैदा हुआ है। इसके अलावा आज भी यहां ऐसी िस्थति है कि कहीं जमादार व इंस्पेक्टर कार्रवाई के लिए पहुंचते हैं तो तुरंत किसी जनप्रतिनिधि, पार्षद व अन्य का फोन आ जाता है। हमें इनको इग्नोर करना होगा।
सवाल : अवेयरनेस के लिए जितने अभियान चलने चाहिए वो दिखते नहीं हैं ?
जवाब : कोशिश हम पूरी करते हैं, हाल ही में दुकानदारों की सहूलियत के लिए अश्विनी बाजार में स्टील के महंगे डस्टबीन लगाए। मकसद था कि दुकान देरी से खोलने पर कचरा सीधा उसमें डालें और हमारा ऑटो इसे ले जाए, लेकिन लोगों ने इन्हें तोड़ दिया। शौचालय पर भी व्यवस्था कर रहे हैं कि सुलभ के साथ साझा करें, ताकि वहां कार्मिक बैठे। कचरा सडक़ों पर नहीं आकर डस्टबीन में ही डाले, इसके लिए लोगों को पहले समझाइश कर जागरूक करेंगे, नहीं मानेंगे तो सख्ती करेंगे।
सवाल : ऐसा क्या नया करेंगे कि सफाई व्यवस्था और दुरुस्त हो ?
जवाब : समझाइश व सख्ती के साथ ही कुछ गंदे वार्डों का चयन कर वहां सीसीटीवी कैमरे से सर्विलांस करेंगे ताकि सडक़ पर कचरा डालने वालों को पकड़ा जा सके। साफ सुथरा वार्ड चयनित कर सम्मानित करने के लिए प्रस्ताव लिया जाएगा। कोशिश करेंगे कि डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था सुबह व रात को चालू करें ताकि नौकरीपेशा से लेकर हर व्यक्ति कचरा डाल सके।
सवाल : अंदरुनी शहर में स्मार्ट सिटी के कार्यों से कितना संतुष्ट हैं?
जवाब : बिल्कुल संतुष्ट नहीं है। शुरुआत में सर्वऋतु विलास क्षेत्र में तकनीकी जानकारों से काम करवाया था, वहां किसी तरह की दिक्कत नहीं आ रही। इसके बाद ऐसे लोगों को ठेके दे दिए, जिन्हें कोई जानकारी ही नहीं। हर कहीं से खुदाई कर दी, सीवरेज निकाल दी, अब वह बार-बार चौक हो रही है। निगम की टीम उसे सही करवा रही है। निगम की टीम नहीं हो तो स्मार्ट सिटी के सभी कामों की पोल खुलकर सामने आ जाए।
Updated on:
27 May 2024 06:58 pm
Published on:
27 May 2024 06:52 pm
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