
भर्ती होने आने वालों में आधे मरीजों का सेचुरेशन लेवल 60 से 70 के बीच
भुवनेश पंड्या
उदयपुर. उदयपुर में वर्तमान मेंं भर्ती होने आने वाले मरीजों में से आधे का सेचुरेशन लेवल 60 से 70 के बीच होना सामने आ रहा हैं। ऐसे में जब तक मरीज को भर्ती कर उपचार शुरू किया जाता है तब तक मरीज दम तोडऩे लगता है। ऐसे में मरीजों को बेहद गंभीर स्थिति में पहुंचने से पहले ही चिकित्सालय का रुख करना ही चाहिए ताकि समय रहते उनका उपचार हो सके।
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1301 मरीज गंभीर
वर्तमान में सभी चिकित्सालयों में भर्ती कुल 1593 मरीजों में से 1308 गंभीर स्थिति में हैं। इसलिए इनमें से 940 ऑक्सीजन पर, 151 आईसीयू और 217 लोग आईसीयू वेंटिलेटर पर हैं। इनमें से फिलहाल करीब 300 से अधिक मरीज गंभीर स्थिति में है, जिनका ऑक्सीजन लेवल 70 से नीचे हैं।
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जांच व उपचार में देरी तो खतरनाक
- कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेन्द्र राठौड़ ने बताया कि पहली बार मरीज संक्रमित होता है तो 24-48 घंटे में उसकी जांच व उपचार शुरू होना चाहिए। जो 5 से 9 दिन में माइल्ड से मोडरेट हो जाता है। विभिन्न बीमारियों वाले मरीजों को तत्काल ऑक्सीजन की जरूरत होती है। सेचुरेशन लेवल 90 से कम, श्वसन दर 25 से अधिक व पल्स रेट 24 से अधिक प्रति मिनट हो जाती है। मोडरेट में भी उपचार शुरू नहीं हुआ तो 9 से 13 दिन में वह सिवियर हो जाता है। ऐसे में उसे बचाना मुश्किल है।
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ये है देरी के कारण
- जांच के लिए भीड़ होने व ज्यादा देर रुकने की परेशानी के कारण लोग जांच के लिए आने में कतराते हैं।
- पॉजिटिव आने या लक्षण पर भी लोग दवाई लेने के लिए तैयार नहीं होते, जबकि सरकारी दवा नि:शुल्क है।
- लॉक डाउन या बंद के कारण भी लोग घर से नहीं निकलते।
- पलंग नहीं मिलने का सोच चिकित्सालय जाने से कतराते हैं।
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50-60 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं, जो 60 या इससे भी कम सेचुरेशन लेवल पर हॉस्पिटल आ रहे हैं। वे जांच में देरी कर रहे हैं तो उपचार भी समय पर नहीं ले रहे, ऐसे में बेहद गंभीर होने पर वे यहां पहुंचते है, तब तक काफी देर हो जाती है, इससे कई मरीजों को बमुश्किल बचाया जाता है। सभी को लक्षण होते ही तत्काल हॉस्पिटल पहुंचना है।
डॉ. लाखन पोसवाल, प्राचार्य, आरएनटी मेडिकल कॉलेज, उदयपुर
Published on:
28 Apr 2021 07:15 am
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