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डैम में डूबने से तीन मासूम भाई-बहन की मौत, एक ही चिता पर हुआ अंतिम संस्कार, पूरे गांव छाया मातम

Udaipur News: खेरवाड़ा थाना क्षेत्र के गबार फला लराठी गांव के तीन मासूम भाई-बहनों की रविवार को कागदर डैम में डूबने से मौत हो गई।
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डूबने से तीन मासूम भाई-बहन की मौत: फोटो पत्रिका नेटवर्क

उदयपुर। खेरवाड़ा थाना क्षेत्र के गबार फला लराठी गांव के तीन मासूम भाई-बहनों की रविवार को कागदर डैम में डूबने से मौत हो गई। तीनों अपनी भैंस को ढूंढने के लिए कागदर डैम के बेक वाटर क्षेत्र की ओर गए थे। रात तक घर नहीं लौटने पर परिजनों ने रातभर काफी ढूंढा, लेकिन पता नहीं चला। सुबह मजदूरी पर जाने वाले मजदूरों ने डेम में तीनों के शव देखे तो पूरी घटना का पता चला।

पुलिस के अनुसार गबार फला निवासी दिनेश मीणा का 11 वर्षीय पुत्र कल्पेश, 13 वर्षीय पुत्री खुशबू व 15 वर्षीय पुत्री निरमा की मौत हो गई। सूचना पर कादगर डेम के समीप ग्रामीण एकत्र हो गए व तीनों बच्चों के शव निकाले गए। बताया गया कि भैंस सामने वाले छोर पर थी, इस पर बच्चे पानी में उतरकर सामने की ओर जाने लगे और बीच में पानी की गहराई अधिक होने से संभवतया डैम में डूब गए। सूचना पर थाना अधिकारी दलपत सिंह राठौड के निर्देशन में सहायक उप निरीक्षक दिग्विजय सिंह मय जाप्ता मौके पर पहुंचे और तीनों के शव निकलवाकर सीएचसी खेरवाड़ा की मोर्चरी में रखवाया।

पूरे गांव में नहीं जले चूल्हे

गांव में एक ही परिवार के तीन बच्चों की एक साथ दर्दनाक मौत से परिजनों सहित पूरा गांव सकते में आ गया और मातम छा गया। घटना को देखते हुए पूरे गांव में चूल्हे तक नहीं जले। गांव वालों का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और इस तरह की घटना ने पूरे परिवार को झकझोर दिया। ग्रामीणों ने प्रशासन से परिवार को आर्थिक सहायता मुहैया कराने की मांग की है।

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कई बार की पुल निर्माण की मांग

कागदर डैम के बैक वाटर को पार करके वर्ष में ग्रामीणों को कई बार गुजरना पड़ता है। इस मुश्किल से निजात पाने के लिए कई बार पुल निर्माण की मांग जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन से की गई। हालांकि एक पुल का निर्माण हुआ, लेकिन वह लगभग एक से दो किलोमीटर की दूरी पर बनने से इस क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों को कोई विशेष फायदा नहीं हो पाया।

एक ही चिता पर हुआ तीनों का अंतिम संस्कार

खेरवाड़ा पुलिस ने सोमवार शाम 4 बजे तीनों बच्चों का पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सुपुर्द किए। इसके बाद परिजनों एवं ग्रामीणों ने एक ही चिता पर शाम साढ़े पांच बजे के बाद अंतिम संस्कार किया गया।