
पत्रिका फाइल फोटो
Fuel Surcharge: उदयपुर। बिजली बिलों में लगाए जा रहे ईंधन और विद्युत क्रय समायोजन अधिभार को लेकर बड़ा वित्तीय अंतर सामने आया है। आंकडों के विश्लेषण से सामने आया कि अप्रैल से दिसम्बर 2025 के बीच उपभोक्ताओं से 9400 करोड़ रुपए अधिक वसूला गया है। प्रदेश में बिजली बिलों में राशि समायोजित होनी चाहिए, लेकिन विद्युत निगमों के पास इसका कोई प्लान नहीं है।
प्रदेश के विद्युत वितरण निगम के गत 26 फरवरी के आदेश के अनुसार दिसंबर 2025 के लिए मार्च 2026 में समायोजित होने वाला ईधन और विद्युत क्रय समायोजन अधिभार माइनस 1.9 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। औसत बिलिंग दर 7.49 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से यह लगभग 14 पैसे प्रति यूनिट घटने के बराबर है।
हालांकि उपभोक्ताओं से पहले ही आधार ईधन अधिभार 28 पैसे प्रति यूनिट वसूला जा चुका है। इस तरह दिसम्बर में ही 42 पैसे प्रति यूनिट तक का अंतर साफ दिखता है। अप्रेल 2025 से ईधन अधिभार की गणना का तरीका बदल दिया गया है। पहले यह सीधे प्रति यूनिट दर से वसूला जाता था, लेकिन अब इसे ऊर्जा प्रभार और स्थायी प्रभार पर प्रतिशत के रूप में लागू किया जा रहा है।
अप्रेल 2025 से ईंधन अधिभार की गणना का तरीका बदल दिया गया है। पहले यह सीधे प्रति यूनिट दर से वसूला जाता था, लेकिन अब इसे ऊर्जा प्रभार और स्थायी प्रभार पर प्रतिशत के रूप में लागू किया जा रहा है। उनका तर्क है कि ईंधन लागत का असर केवल ऊर्जा प्रभार पर पड़ता है, इसलिए स्थायी प्रभार पर इसे जोड़ना उचित नहीं है।
अप्रेल से सितम्बर 2025 के बीच वास्तविक ईंधन अधिभार का कुल प्रभाव 6.11 प्रतिशत रहा। उस अवधि में औसत बिलिंग दर 7.75 रुपए प्रति यूनिट थी, जिसके आधार पर वास्तविक अधिभार लगभग 47 पैसे प्रति यूनिट बैठता है। इसके विपरीत छह माह तक उपभोक्ताओं से आधार ईंधन अधिभार 28 पैसे प्रति यूनिट वसूला गया।
छह माह में वसूली 1.97 रुपए प्रति यूनिट तक पहुंची, जबकि वास्तविक देय 47 पैसे प्रति यूनिट थी। इस प्रकार 1.50 रुपए प्रति यूनिट अतिरिक्त वसूली हुई है। इस अवधि में औसतन 900 करोड़ यूनिट बिजली प्रति माह खरीद हुई तो छह माह में 5400 करोड़ यूनिट बिजली का लेनदेन हुआ। ऐसे में अतिरिक्त वसूली राशि 8100 करोड़ रुपए है।
अक्टूबर से दिसम्बर 2025 के बीच भी वास्तविक अधिभार कम रहा। तीन माह में प्रभाव माइनस 1.16 प्रतिशत रहा, जो औसत बिलिंग दर 7.49 रुपए प्रति यूनिट पर माइनस 8.68 पैसे प्रति यूनिट के बराबर है। जबकि इस अवधि में भी 28 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से 84 पैसे प्रति यूनिट वसूले जा चुके हैं। इस अवधि में 92.68 पैसे प्रति यूनिट राशि वापस किए जाने योग्य है।
ईंधन अधिभार का निर्धारण केवल ऊर्जा प्रभार पर प्रति यूनिट आधार पर होना चाहिए। उनका सुझाव है कि अप्रेल 2025 से दिसम्बर 2025 तक की पूरी अवधि की पुनर्गणना कर उपभोक्ताओं से वसूली गई अतिरिक्त राशि को बिजली बिलों में स्पष्ट रूप से क्रेडिट के रूप में दर्शाया जाए।
इंजीनियर येवंतीकुमार बोलिया, पूर्व एसई व ऊर्जा सलाहकार
Published on:
11 Mar 2026 09:21 am
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