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यहां गलियां और रास्ते जाने कहां ले जाएं…गूगल मैप भी नहीं ढूंढ पाए

पर्यटन व होटल व्यवसायी लंबे समय से कर रहे शहर में आधुनिक साइन बोर्ड लगाने की मांग, शहर के प्रमुख चौराहों व एंट्री पॉइंट्स पर शहर का मैप और पर्यटन स्थलों के प्रचार-प्रसार के बोर्ड भी जरूरी
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केस 1 : जर्मनी और उत्तराखंड से आए कुछ पर्यटक कार से मेनार गांव से उदयपुर की ओर आ रहे थे। वे गूगल मैप के सहारे रास्ता तय कर रहे थे। जब वे नवानिया राजमार्ग पर थे, तब एप ने उन्हें एक वैकल्पिक मार्ग दिखाया, लेकिन इस वैकल्पिक मार्ग के चक्कर में उनकी कार ऐसे सुनसान रास्ते पर जाकर फंस गई, जहां से निकलने में ही उन्हें घंटों लग गए।

केस 2 : गुजरात से आए पर्यटक जब कार लेकर करणी माता जाना चाहते थे तो पारस और आसपास के क्षेत्र से करणी माता मंदिर को सर्च करने पर गूगल मैप माछला मगरा स्थित गोसिया कॉलोनी में उन्हें ले गया। ऐसे में कई लोगों से रास्ता पूछने के बाद वे करणी माता मंदिर तक पहुंचे।

क्या आप कभी किसी फॉरेन कंट्री में घूमने गए हैं तो वहां हर स्ट्रीट पर दिशासूचक और पर्यटन स्थलों के लिए साइन बोर्ड लगे आसानी से नजर आ जाएंगे। वहीं देश में भी केरल, हिमाचल आदि जगहों के प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए साइन बोर्ड रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट पर लगे नजर आ जाएंगे। कई ने तो ये व्यवस्था भी कर रखी है कि पर्यटकों को उस राज्य के पर्यटन विभाग के एप से ही सारे पर्यटन स्थलों की जानकारी आसानी से मिल जाती है। अब उदयपुर भी देश का एक पॉपुलर डेस्टिनेशन बन चुका है, लेकिन यहां के रास्ते और गलियां बिना मैप और साइन बोर्ड के भूलभुलैया से कम नहीं है।

केवल एयरपोर्ट पर लगा आधुनिक साइन बोर्ड, बाकी कहीं भी मैप व साइन बोर्ड नहीं

उदयपुर के महाराणा प्रताप एयरपोर्ट कुछ समय पूर्व आधुनिक साइन बोर्ड लगाया गया है, जिसमें क्यूआर कोड स्कैन करते ही शहर का मैप मोबाइल पर खुल जाता है। इसके अलावा शहर के रेलवे स्टेशन, बस स्टेंड और शहर के एंट्री गेट जैसे पारस तिराहा, भुवाणा, अम्बेरी, प्रतापनगर आदि किसी चौराहे पर ना तो शहर के मैप लगे हैं और ना ही कहीं शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर जाने के लिए कोई साइन बोर्ड ही लगे हैं। पर्यटन व्यवसायियों के अनुसार लेकसिटी का नाम दुनियाभर में मशहूर है, लेकिन जब पर्यटक यहां आते हैं तो कहीं भी उन्हें शहर का मैप नहीं मिलता। एक भी जगह पर शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों का प्रचार-प्रसार वाले बोर्ड नजर नहीं आते। ऐसे में पर्यटकों को गूगल मैप के भरोसे ही रहना पड़ता है।

पर्यटन विकास समिति की बैठक में कई बार उठ चुका मुद्दा

पर्यटन विकास समिति की बैठक में भी शहर में पर्यटन स्थलों के साइन बोडर्स लगाने को लेकर मुद्दा कई बार उठ चुका है। शहर में कहीं पर भी पुराने व नए पर्यटन स्थलों के आकर्षक साइन बोर्ड नहीं लगा रखे हैं। नई जगहों को लेकर भी प्रचार-प्रसार के लिए मैप्स होने चाहिए। पर्यटन व्यवसायियों के अनुसार हर बार शहर की तुलना विदेश के खूबसूरत शहरों से की जाती है, लेकिन वहां हर जगह साइन बोर्ड, इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले, मैप्स आदि लगे होते हैं। अब डिजिटल जमाना है तो उसके अनुसार एलइडी डिस्प्ले बोर्ड, जो रात में भी आकर्षित करें, डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाने चाहिए।

इनका कहना है ...

पर्यटकों को शहर में प्रवेश करते ही बहुत से स्थान पर साइन बोर्ड नहीं होने के कारण गलत दिशाओं में भटक जाना पड़ता है। इसलिए उचित मार्ग निर्देशन के लिए साइन बोर्ड और पर्यटन स्थलों के प्रचार-प्रसार करने वाले बोर्ड और उन तक पहुंचने के निर्देश भी सभी जगह पर्यटक स्थलों से पूर्व लगाने चाहिए।

राजेश अग्रवाल, उपाध्यक्ष,होटल एसोसिएशन उदयपुर