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चेतावनी के बाद भी नहीं माने, दो पेट्रोल-डीजल नावें सीज

हाईकोर्ट के आदेश की पालना में ताज लेक पैलेस व उदय कोठी की नावें जब्त उदयपुर. शहर की झीलों में बढ़ते प्रदूषण को रोकने और उच्च न्यायालय के आदेशों की पालना सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने सख्त कार्रवाई की है। शुक्रवार को निगम की टीम ने पिछोला झील क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए […]

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समिति की बैठक में आदेशों की सख्ती से पालना सुनिश्चित करने और नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों के खिलाफ सीजिंग की कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इसी क्रम में निगम ने यह कार्रवाई की है।

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हाईकोर्ट के आदेश की पालना में ताज लेक पैलेस व उदय कोठी की नावें जब्त

उदयपुर. शहर की झीलों में बढ़ते प्रदूषण को रोकने और उच्च न्यायालय के आदेशों की पालना सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने सख्त कार्रवाई की है। शुक्रवार को निगम की टीम ने पिछोला झील क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए होटल ताज लेक पैलेस और होटल उदय कोठी की एक-एक पेट्रोल-डीजल चालित नाव को अग्रिम आदेश तक सीज कर दिया।

जानकारी के अनुसार नगर निगम की टीम शुक्रवार दोपहर दूधतलाई स्थित पिछोला की पाल पर पहुंची और दोनों होटलों की जेटी के पास खड़ी नावों को जब्त किया। निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने बताया कि राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुसार झीलों में पेट्रोल-डीजल चालित नावों को चरणबद्ध तरीके से बंद कर बैटरी या सोलर ऊर्जा से संचालित नावों को चलाने के निर्देश दिए गए हैं। संचालक नियमों की अवहेलना कर रहे हैं। निगम ने संबंधित होटल संचालकों को पहले नोटिस जारी किए थे। पालना नहीं होने पर यह कार्रवाई की गई।

बैठकों में कई बार उठा मुद्दा

प्रशासनिक बैठकों और जिला झील संरक्षण एवं विकास समिति की बैठकों में झीलों में पेट्रोल-डीजल चालित नावों के संचालन को बंद करने का मुद्दा कई बार उठ चुका है। इसके बावजूद कुछ संचालक नियमों की अनदेखी कर रहे थे।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद सख्ती

नगर निगम आयुक्त ने बताया कि 30 मार्च 2022 को उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने झीलों में पेट्रोल-डीजल चालित नावों को बंद कर बैटरी या सोलर ऊर्जा से चलने वाली नावें संचालित करने के निर्देश दिए थे। इसके तहत 10 मई 2025 को आयोजित जिला झील संरक्षण एवं विकास समिति की बैठक में 15 अगस्त 2025 तक नावों को सोलर या बैटरी आधारित प्रणाली में परिवर्तित करने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद 10 फरवरी 2026 को जिला कलक्टर की अध्यक्षता में हुई समिति की बैठक में आदेशों की सख्ती से पालना सुनिश्चित करने और नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों के खिलाफ सीजिंग की कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इसी क्रम में निगम ने यह कार्रवाई की है।