
जाने-अनजाने में बाल संप्रेक्षण गृह की दहलीज पर कदम रखने वाले बच्चों को परिवार सा प्यार दिया जा रहा है।
मोहम्मद इलियास/उदयपुर
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से बालगृहों का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। इनमें बालगृहों में कई अनियमितता मिली। कुछ बालगृहों में ऐसे बच्चे भी मिले, जिनके माता-पिता होने के बावजूद उन्हें निराश्रित बताकर वहां रखा हुआ था। निराश्रित बच्चों के नाम से सरकार से अनुदान उठ रहा था।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव कुलदीप शर्मा ने बताया कि जिले में संचालित सरकारी व अनुदानित बालगृहों में बालक-बालिकाओं को दिए जाने वाले नाश्ते, लंच व डीनर के फोटोग्राफ्स को वाट्सएप गु्रप से मंगवाए जा रहे थे। सोमवार को गु्रप में सुखेर स्थित जीवन ज्योति संस्था द्वारा फोटोग्राफ नहीं डाले गए। संदेह होने पर टीम ने सुबह 11 बजे संबंधित बालगृह पर औचक निरीक्षण किया।
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ये मिली अनियमितताएं
- निरीक्षण के दौरान मुख्य द्वार पर चौकीदार नहीं था।
- अनुदानित बालगृह एवं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित छात्रावास एक ही भवन में संचालित है। जहां पर स्वीपर की कोई व्यवस्था नहीं है। साफ सफाई का अभाव मिला।
- बालकों को नाश्ता नहीं दिया गया है। डाइट प्लान के अनुसार सोमवार को उन्हें दूध पोहा देना था।
- जीवन ज्योति अनुदानित बाल गृह है । बाल गृह में निरााश्रित बच्चों को रखा जाना चाहिए। रजिस्टर की जांच में पाया कि जो बच्चे निराश्रित नहीं है उन्हें भी बाल गृह में रखा हुआ था।
- बालगृह में 50 बालकों पर 15 का स्ॅटाफ स्वीकृत है लेकिन मौके पर केवल मात्र दो रसोइयें एवं एवं दो केयर टेकर मिल।
- सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के छात्रावास स्टॉफ उपस्थिति रजिस्टर की जांच करने पर पाया गया कि अगस्त 2022 के बाद अनुदानित छात्रावास में स्टॉफ लगाया ही नहीं गया। रजिस्टर जब्त किया गया, जिसके बारे में जयपुर मुख्यालय में कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा।
-अनुदानित छात्रावास एवं बालगृह में 25 का स्टॉफ होना चाहिए लेकिन निरीक्षण के समय मात्र 4 कार्मिक ही मिले। छात्रावास एवं बालगृह दोनों एक ही भवन में संचालित होना सरकारी अनुदान का दुरुपयोग है ।
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पांच बालिकाएं मिलीे मां-बाप के साथ, बना दिया निराश्रित
मीरा निराश्रित गृह महिला मंडल की 5 बालिकाएं परिजनो के साथ मिली बाल कल्याण समिति के कार्यालय में मिली। एडीजे कुलदीप शर्मा द्वारा उन्हें पूछताछ करने पर अध्यक्ष एवं सदस्यों के बाल कल्याण समिति कार्यालय में नहीं मिलने पर अध्यक्ष धु्रव कुमार कविया को फोन किया तो बताया कि वे अवकाश पर है। आधे घंटे बाद सदस्य सुरेश जोशी कार्यालय में उपस्थित हुए। बालिकाओं ने एडीजे को बताया कि वे दिवाली मनाने अपने घर गई थी। उन्हें मीरा निराश्रित अनुदानित गृह से पुन: बाल कल्याण समिति से आदेश लेकर आने के लिए बोला गया। वे पिछले 5 वर्ष से अनुदानित गृह में आवासित है। उन्होंने वहां खाना सही नहीं होने की शिकायत की।
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अनुदान के लिए बना दिए निराश्रित
एडीजे ने बताया कि जो बालक-बालिकाए निराश्रित नहीं है उन्हें भी निराश्रित बनाकर गृहों में रखा हुआ था ताकि उनके नाम पर सरकार से अनुदान लिया जा सके। ये सरकारी अनुदान का दुरुपयोग है । इस संबंध में एडीजे ने उदयपुर जिले में संचालित समस्त बाल-गृहों को पिछले 5 वर्षो का डेटा सहायक निदेशक बाल अधिकारित विभाग उदयपुर से मांगा है।
Published on:
03 Nov 2022 09:53 pm
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