
मेवाड़ी योद्धा और दुनिया में अपने शौर्य, पराक्रम के लिए पूजे जाने वाले वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप पर अब तक यूं तो अनगिनत चित्र और पेंटिंग्स बनाई जा चुकी हैं, लेकिन अब मेवाड़ की मशहूर मिनिएचर पेंटिंग में महाराणा प्रताप के ऐसे चित्र बनाए जा रहे हैं, जो अब तक कभी नहीं बनाए गए। ये काम कर रहे हैं उदयपुर के मिनिएचर आर्टिस्ट जितेंद्र आर शर्मा। जितेंद्र प्रताप के जीवन के अनछुए प्रेरक प्रसंगों पर मिनिएचर पेंटिंग्स तैयार कर रहे हैं। उन्होंने हल्दी घाटी युद्ध के 447 वें से 450वें वर्ष तक प्रताप के चित्र बनाने का संकल्प लिया है।
पहली पेंटिंग बन कर तैयार
शहर के पिछोली क्षेत्र के निवासी आर्टिस्ट जितेंद्र ने बताया कि पिछले दिनों करणी माता मंदिर में एक पैंथर आया था, तब ख्याल आया कि महाराणा प्रताप तो जंगल में ही रहते थे, उनके सामने भी ये आते रहते होंगे। इस बारे में साहित्यकार डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू से चर्चा की तो उन्होंने ये प्रसंग बताया कि मेवाड़ के लोग शेर से आतंकित होकर महाराणा प्रताप के पास पहुंचे थे। तब महाराणा ने उनसे कहा कि मेवाड़ के लोग बकरे नहीं हैं। शेर का सामना कर सकते हैं, तब लोगों ने कहा कि शेर का सामना तो शेर ही कर सकता है। तब जहां शेर बैठा हुआ था, महाराणा प्रताप उस जगह जाकर विराजमान हो गए। इसी प्रसंग पर पेेंटिंग बनाने का ख्याल आया और सबसे पहली पेंटिंग यही बनाई।
प्राकृतिक रंगों और कूंची का प्रयोग, एक पेंटिंग बनाने में 15 दिन
शर्मा ने बताया कि उन्होंने पेंटिंग्स बनाना प्रसिद्ध कलाकार नरोत्तमलाल शर्मा के पुत्र आनंदीलाल शर्मा से सीखा। उन्होंने मिनिएचर, पिछवई आदि कई पेंटिंग्स करना सिखाया। उन्होंने बताया कि महाराणा प्रताप की पेंटिंग्स बनाने के लिए मेवाड़ी लघुचित्र कला शैली मिनिएचर आर्ट को चुना। इसके लिए प्राकृतिक रंगों व कूंची का प्रयोग किया है। इसके लिए पेपर भी बहुत पुराना लिया जाता है। वहीं, हर प्रसंग अलग होगा और एक तरह से ये सीरिज होगी। जिसमें हल्दी घाटी सहित महाराणा से संबंधित सभी स्थलों को लिया जाएगा। पेंटिंग को तैयार करने में लगभग 15 दिन लग जाते हैं। ऐसे में ये कार्य 3 से 4 साल में पूरा हो सकेगा।
Published on:
24 Jun 2023 04:32 pm
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