
Court decision
उदयपुर. व्यक्तिगत ऋण होने के बावजूद फोर क्लोजर के नाम पर चार्ज काटने पर स्थाई लोक अदालत ने एक हाउसिंग कंपनी की सेवा में दोषकारित किया। अदालत के अध्यक्ष के.बी.कट्टा, सदस्य ब्रजेन्द्र सेठ व सुशील कोठारी ने कंपनी को परिवादी के खाते से काटी फ्लोर क्लोजर की राशि व ब्याज सहित 1.57 देने के आदेश दिए। साथ ही मानसिक, शारीरिक प्रताडऩा व आर्थिक व्यय के 20 हजार रुपए अलग से दिलाए। न्यायालय ने यह निर्णय हजारेश्वर कॉलोनी निवासी यशवंत शर्मा की ओर से इंडिया इन्फोलाइन हाउसिंग लिमिटेड जरिए शाखा प्रबंधक के खिलाफ दर्ज परिवाद में दिया। परिवाद ने बताया कि उसने अपना मकान गिरवी रखकर कंपनी से 1.79 करोड़ का ऋण लिया था। अच्छी साख के चलते कंपनी ने उसी दस्तावेज पर 40.24 लाख का और ऋण दिया, लेकिन उन्होंने फर्म को उपआवेदक के रूप में जोड़ दिया। स्टेटमेंट के अनुसार उसी अंतिम किश्त के 38.03 लाख रुपए थे लेकिन कंपनी ने फोर क्लोजर के नाम से 1.52 लाख रुपए अधिक ले लिए। फोर क्लोजर सिर्फ फर्म के नाम से ऋण लेने पर होता है लेकिन ऋण उसके स्वयं के नाम था।
Published on:
21 Nov 2018 07:38 pm
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