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भगवान भला करे, बच्चे तक मांग रहे भीख

भगवान भला करे, बच्चे तक मांग रहे भीख भिक्षामुक्त अभियान फेल - चौराहे व पर्यटक स्थलों पर रोज खा रहे दुत्कार- पुलिस प्रशासन जानकार अनजान - स्वयं सेवी संस्था सिर्फ कर रही दिखावा

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udaipur child beggers

भगवान भला करे, बच्चे तक मांग रहे भीख

भगवान भला करे, बच्चे तक मांग रहे भीख

भिक्षामुक्त अभियान फेल

- चौराहे व पर्यटक स्थलों पर रोज खा रहे दुत्कार
- पुलिस प्रशासन जानकार अनजान

- स्वयं सेवी संस्था सिर्फ कर रही दिखावा
उदयपुर. पुलिस-प्रशासन की ओर से शहर को भिक्षामुक्त करने का अभियान सिर्फ दो-चार दिन की कार्रवाई व कागजों में ही सिमट कर रह गया। न तो स्वयंसेवी संस्थाओं ने इस पर कोई ध्यान लगाया न ही पुलिस व प्रशासनिक स्तर पर इसकी कोई देखरेख हुई। शहर के समस्त चौराहों व पर्यटक स्थलों पर खुलेआम बच्चे भीख मांगते हुए रोज दुत्कार खा रहे है। कोई मां अपने आंचल में छोटे बच्चे को दबाकर तो कई जगह पांच सात साल के बच्चे चौराहे पर वाहन चालकों व पर्यटकों के पीछे दौड़ते नजर आ रहे है।

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मंगलवार व शनिवार तो स्कूल की छुट्टी

भिक्षावृत्ति में लिप्त इन बच्चों के बारे में जब पत्रिका ने पड़ताल की तो पता चला कि कुछ बच्चे स्कूल जाते हंै लेकिन भीख मांगने के चक्कर में वे मंगलवार व शनिवार को स्कूल की छुट्टी कर लेते है। इनमें शनिवार के दिन भीख मांगने वाले बच्चे ज्यादा है। इन बच्चों को महज 50 रुपए प्रतिदिन में कमंडल थमाकर भीख मांगने बयानों में पुष्टि होने के बावजूद आज तक पुलिस-प्रशासन ने उन आरोपियों को नहीं पकड़ा न हीं स्कूल से गायब होने वाले इन बच्चों को रोकने के लिए शिक्षा विभाग के मार्फत कोई कार्रवाई की गई।
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हर दिन बदलते हैं भगवान

शनिवार तो बच्चे शनि महाराज व मंगलवार को बालाजी के नाम पर सबसे ज्यादा मांगते है। इन दो दिन तो बच्चे चौराहों के अलावा गली मोहल्लों में नजर आते है। इसके अलावा कुछ बच्चों व उनके परिजनों ने तो हर दिन भगवान बदलने का रिवाज बना रखा है। वे सोमवार-शिव के नाम पर जय महादेव, मंगलवार को बालाजी के नाम पर जय हनुमान, बुधवार को गणपति जी के नाम पर गणपति बप्पा मोरिया, गुरुवार- बृहस्पति व विष्णु जी के नाम पर, शुक्रवार को महालक्ष्मी व संतोषी माता के नाम पर, शनिवार को शनि महाराज व रविवार को सूर्य भगवान के नाम से मांगते है।
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नियम तो यह है

किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं सरंक्षण) अधिनियम-2000 की धारा 2 (के) तहत बच्चे की उम्र 18 वर्ष निर्धारित की गई है। इसमें भिक्षावृत्ति को भी परिभाषित कर स्पष्ट कहा गया है कि इनकी देखभाल एवं संरक्षण करना होगा।
- चौराहों, सार्वजनिक स्थलों, पर्यटन क्षेत्र में भिक्षावृत्ति का कार्य करने वालों बच्चों व परिवार के साथ दुर्घटनाएं होती है। आम लोगों को भी समस्याओं को सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति प्रशासन व स्वयं सेवी संस्थाएं समझाइश कर पुर्नवास करेगी।

- भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों बालगृहों के माध्यम से भोजन, कपड़े व अल्पकालीन आवास की व्यवस्था की जाएगी।
- बच्चे जिनके परिवार नहीं है उनको पंजीकृत कर स्वयंसेवी संस्था सुविधा उपलब्ध करवाएगी।

- भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों की सूचना मिलने पर बाल कल्याण समिति को 24 घंटे में प्रसंज्ञान लेकर पुलिस को आदेशित करेंगी ताकि वे पुन: भीख न मांगें।
- यातायात पुलिस चौराहे पर भीख मांगने वाले बच्चों की पहचान कर प्रशासन व स्वयंसेवी संस्था को बताएंगे तथा प्रचार प्रसार करेंगे।