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आदमी मर गया है, साहब – दो शब्द लिखकर दे दो…….

- दिनभर दौड़ाया, शाम को बोले ‘अब कल आना’ - मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भटकते रहे परिजन-
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young man Death falling in pit

young man Death falling in pit

उदयपुर . साहब, आपके अस्पताल में ही आदमी मरा है। सिर्फ कागज पर लिखकर दे दो कि उसकी मौत हो गई। परिजनों के इस अनुनय -विनय को सुनकर हर कोई द्रवित हो गया लेकिन अस्पताल के कार्मिक जरा भी नहीं पसीजे। कोसों दूर से किराए की गाड़ी लेकर आए परिजनों को कार्मिकों ने सुबह से शाम तक अलग-अलग दफ्तरों में चक्कर कटवाए। शाम को ड्यूटी का समय पूरा होते ही कार्मिक घर चले गए लेकिन उन्होंने मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं दिया और बोले ‘अब कल आना।’

यह वेदना भरतपुर जिले के जीराहेड़ा पहाड़ी निवासी मजलिस खां व उनके परिजनों की है। इनके परिवार के वारिश (20) पुत्र इस्माइल मेव का गत 5 दिसम्बर को गंगरार के निकट एक दुर्घटना में निधन हो गया था। पेशे से ट्रक चालक वारिश दुर्घटना के दौरान खलासी मोहसम के साथ मुंबई से दिल्ली जा रहा था। हादसे में चालक व खलासी दोनों घायल हो गए। गंगरार में चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर घायलावस्था में दोनों को यहां एमबी चिकित्सालय रेफर किया लेकिन रास्ते में वारिश ने दम तोड़ दिया। 6 दिसम्बर को चिकित्सकों ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के सुपुर्द किया। उसी दिन घायल खलासी को छुट्टी दे दी लेकिन उसे भी डिस्चार्ज टिकट नहीं दिया।

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किराए की गाड़ी लेकर आए, निकाल दिया दिन

दुर्घटना क्लेम के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र की आवश्यकता होने पर परिजन किराए की गाड़ी से पहले गंगरार थाने पहुंचे, जहां आईओ ने उन्हें पंचनामा रिपोर्ट देकर मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए एमबी चिकित्सालय भेज दिया। परिजन सुबह 8 बजे अस्पताल पहुंच गए। परिजन जैसे-तैसे रिकॉर्ड रूम में पहुंच गए, जहां तैनात मैडम ने पहले उन्हें अधीक्षक कार्यालय से लिखवा कर लाने के लिए भेज दिया। प्राचार्य कार्यालय, रिकॉर्ड रूम, मुर्दाघर, मेडिकल कॉलेज सहित अन्य विभागों के चक्कर काटते हुए परिजनों का पूरा दिन गुजर गया लेकिन किसी ने उन्हें कौन सा कागज कहां मिलेंगे, कोई जानकारी नहीं दी।

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पत्रिका ने मदद की तब तक रिकॉर्ड रूम बंद

अस्पताल में चक्कर काटते हुए पीडि़त परिवार अपराह्न साढ़े तीन बजे मुर्दाघर में पहुंचा। पत्रिका संवाददाता ने थके-हारे परिजनों से बातचीत की तो पूरा माजरा सामने आया। संवाददाता ने मोबाइल पर गंगरार थाने के आईओ से बातचीत कर ऑनलाइन पोस्टमार्टम रिपोर्ट मंगवाई। बाद में सभी दस्तावेज तैयार कर रिकॉर्ड रूम भेजा तो वहां ड्यूटी टाइम पूरा होने की बात कहकर कल आने का कहकर टाल दिया।