
राजनीतिक द्वेषता और अधिकारियों की आपसी खींचतान में शहर पर करीब 13 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की राह फिर खुलने की उम्मीद अब बंधी है। प्रत्येक वार्ड में 28 लाख रुपए का औसतन बजट खर्च हो सकेगा। करीब तीन महीने पहले जिन टैण्डर को स्थगित किया गया, उसे फिर पिछले महीने क्रियान्वित करने के लिए प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन एेनवक्त पर नगर परिषद आयुक्त ने यह पूरी प्रक्रिया स्थगित कर दी। इससे शहर के विकास कार्यों पर एकाएक ब्रेक लग गई।
स्वच्छ भारत मिशन के राजस्थान के ब्रांड एम्बेडसर और डूंगरपुर नगर परिषद सभापति केके गुप्ता ने जिला कलक्टर, नगर परिषद सभापति, आयुक्त और जिले के विभिन्न नगर पालिका अध्यक्षों, ईओ और पार्षदों को शहर के विकास का पाठ पढ़ाया था, इस वर्कशॉप में परिषद प्रशासन की हुई किरकिरी के बाद सोमवार को पिछले तीन महीने से अटकी टैण्डर प्रक्रिया को फिर से बहाल करने की फाइल को खंगाला गया।
इन-इन मदों पर खर्च होगी राशि
इससे पहले नगर परिषद सभापति अजय चांडक ने पार्षदों और अभियंताआें से रिपोर्ट लेकर एस्टीमेंट तैयार किया था। इसमें प्रत्येक वार्ड में 28 लाख रुपए का बजट खर्च करने का प्रस्ताव तैयार करते हुए निविदा जारी की। पार्कों की मरम्मत के नाम पर चार से पांच करोड़ रुपए, सड़कों व नालियों के निर्माण पर 8 करोड़ रुपए खर्च करना है।
इसी तरह टै्रफिक थाने में कोटा स्टोन और फायर ब्रिगेड में शौचालय आदि का निर्माण करने के लिए बीस लाख रुपए, शहर के मुख्य मार्गों पर थर्मोकॉल से लाइनिंग कार्य पर दस लाख रुपए का प्रस्ताव इस टैंण्डर में लिया था। परिषद बोर्ड ने करीब सवा चार महीने प्रस्ताव तैयार कर शहर का विकास कराने के लिए प्रस्ताव मंजूर किया था।
Published on:
07 Mar 2017 02:57 pm
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