
कोई जानवर के साथ ऐसा नहीं करता लेकिन यहां तो अपनों ने मरने के लिए छोड़ दिया सडक़ों पर
मोहम्मद इलियास/उदयपुर
जीवन के अंतिम पड़ाव में सेवा करने की बजाए अपनों ने 80 वर्षीय वृद्धा को दर-दर ठोकर खाने के लिए उसे सडक़ों पर छोड़ दिया। आमेट (राजसमंद) क्षेत्र से भटकती हुई वृद्धा जैसे-तैसे चार दिन पूर्व यहां बेदला क्षेत्र में पहुंची। यहां दो दिन उसे लोगों ने आश्रय दिया और बाद में बेदला उपप्रधान ने अथक प्रयास कर उसे भुवाणा में सखी महिला संस्थान में रखवाया गया। अपनों के दिए दर्द से अभी वृद्धा अपना मानसिक संतुलन खो बैठी है वह महज बातचीत में ही अपनी आपबीति पर रो पड़ रही है।
वृद्धा महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पद पर कार्यरत थी जो 20 साल पहले रिटायर्ड हो गई। वह चार दिन पहले भटकती हुई बेदला में अपने अफसर रहे किशनसिंह चौहान के मकान पर आ पहुंची। चौहान का निधन होने से उसके पुत्र शक्तिसिंह चौहान ने उन्हें संभाला। वृद्धा का कहना था कि वह चौहान के घर 25 साल पहले एक समारोह में आई थी इस कारण उसे यह घर थोड़ा याद था। बातचीत में उसे लडखड़़ाते हुए अपनों द्वारा घर से निकालने की दास्तां बताई। चौहान ने दो दिन अपने घर रखा। उसके बाद उपप्रधान प्रतापसिंह राठौड़ ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से वृद्धा को भुवाणा स्थित सखी महिला संस्थान में रखवाया। वृद्धा के पास एक थैले में कुछ कपड़े व एक बैंक की पासबुक मिली है।
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अपनों पर लगाया पैसे व जेवर लेने का आरोप
वृद्धा की पासबुक के अनुसार उसे खाते में 2200 रुपए जमा मिले। वृद्धा ने चांदपोल निवासी एक युवक को अपना खाताधारक बना रखा था। शक्तिसिंह चौहान ने युवक से सम्पर्क कर जानकारी जुटानी चाही तो उसने एक साल से वृद्धा से किसी तरह का सम्पर्क नहीं होना बताकर पल्ला झाड़ लिया। वृद्धा ने बातचीत में बताया कि उसकी मुहंबोली बेटी आमेट में रहती है। उसका शराबी पति उसे डराता धमकाता है। वृद्धा ने उन पर उसके पैसे व जेवर उनके पास होने के भी आरोप लगाए।
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Published on:
12 Aug 2021 11:22 am
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