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गाजे-बाजे के साथ निकाली शोभायात्रा

गाजे-बाजे के साथ निकाली शोभायात्रा फ्लेग- छह दिवसीय प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शंाति महायज्ञ शुरू

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गाजे-बाजे के साथ निकाली शोभायात्रा

गाजे-बाजे के साथ निकाली शोभायात्रा

उदयपुर. पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति एवं वासुपूज्य दिगम्बर jain जैन धर्मार्थ एवं सेवार्थ संस्थान की ओर से मुनि अमितसागर, आर्यिका सुभूषणमति एवं प्रशांतमति के पावन सान्निध्य में गायरियावास संतोषनगर स्थित नवनिर्मित जैन मंदिर में शोभायात्रा के साथ 6 दिवसीय वासुपूज्य जिन बिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्वशंाति महायज्ञ प्रारम्भ हुआ।
मंत्री कालूलाल गुड़लिया ने बताया कि प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ सुबह सवा सात बजे ध्वजारोहण के साथ हुआ। इसके बाद हाथी, घोड़े और बैंड बाजों के साथ घट यात्रा, शोभायात्रा व श्रीजी प्रभु की पालकी यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में रथ में सौधर्म इंद्र व कुबेर भी सवार होकर साथ चल रहे थे। संतों के सान्निध्य में निकली शोभायात्रा में समाज के महिला पुरुष, युवा एवं युवतियां भक्ति गीतों पर नृत्य करते चल रहे थे।

मीडिया प्रभारी सुनील चिबोडिय़ा ने बताया कि श्रीजी की पालकी यात्रा संतोष नगर स्थित पंडाल में पहुंची। वहां पर प्रतिष्ठाचार्य की उपस्थिति और मुनि अमित सागर के सान्निध्य में धार्मिक अनुष्ठान हुए। सबसे पहले ध्वजारोहण हुआ, उसके बाद पंडाल का उद्घाटन किया गया। इसके बाद पंडाल के मंच पर मंदिर में श्रीजी को विराजमान कर मंत्रोंच्चार के साथ उनकी पूजा-अर्चना की गई।
दीप प्रज्ज्वलन, मंगलाचरण, चित्र अनावरण, पत्रिका अनावरण के साथ अतिथियों एवं विभिन्न भामाशाह का बहुमान किया गया।

इस अवसर पर मुनि अमित सागर ने पंचकल्याणक महोत्सव के महत्व को विस्तार से बताते हुए कहा कि पंचकल्याणक महोत्सव की परंपरा प्राचीन काल से ही चली आ रही है। सालों पहले इस महोत्सव को एक ही व्यक्ति पूरा करने में सक्षम होता था, लेकिन धीरे-धीरे इसमें बदलाव आया और समाजजन आपसी सहयोग से आयोजन को पूरा करने लगे। उन्होंने कहा कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव करने का अधिकार सिर्फ देवताओं को है मनुष्य को नहीं, इसीलिए बिना सोधर्म इंद्र और कुबेर के यह आयोजन संभव नहीं।
सुभूषणमति ने कहा कि जैन धर्म में आगम के परिप्रेक्ष्य में ही पंचकल्याणक की परंपरा है। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के माध्यम से एक पाषाण को परमात्मा का रूप दिया जाता है।

कार्यक्रम समाप्ति के बाद फिर से श्रीजी की पालकी शोभायात्रा के रूप में गायरियावास स्थित मंदिर परिसर में पहुंची। समारोह में समिति अध्यक्ष पूरणमल चिबोडिय़ा, महामंत्री प्रकाश सिंघवी, शिरोमणि संरक्षक शंातिलाल वेलावत, छगनलाल मलावत, गणेशलाल धनावत, गौरवाध्यक्ष मनोहरलाल धनावत, कार्याध्यक्ष मुकेश गोटी, ललित कुणावत, कोषाध्यक्ष मांगीलाल रूपजियोत सहित अनेक पदाधिकारी मौजूद थे।

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