
डॉ सुशील कुमार सिंह /उदयपुर. उपचार सुविधा में आदर्श कहे जाने वाले संभाग के सबसे बड़े महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय के रिकॉर्ड कक्ष की व्यवस्थाएं ‘वेंटीलेटर की ऑक्सीजन’ पर चल रही हैं। लाखों की संख्या में इन डोर, आउटडोर, जन्म और मृत्यु पंजीयन का रिकॉर्ड समेटे इस कक्ष का निर्धारित तौर पर कोई धणी-धोरी नहीं है। आदेश के महीनों बाद भी मंत्रालयिक कर्मचारी ने रिकॉर्ड रूम का जिम्मा नहीं संभाला है, जबकि कार्मिक की मांग पर गठित कमेटी मामले को लेकर हाथ पर हाथ धरे किसी बड़ी गलती के होने की राह तक रही है।
अस्थायी कर्मचारियों के भरोसे यहां रिकॉर्ड संधारण तो हो रहा है, लेकिन मार्गदर्शन के अभाव में रिकॉर्ड की होने वाली बर्बादी को लेकर किसी भी स्तर पर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही। नतीजन पूरा रिकॉर्ड भंगार खाने की तरह बिखरा हुआ है। गौरतलब है कि करीब ५ माह पहले चिकित्सालय प्रशासन ने एक आदेश जारी कर रिकॉर्ड रूम का जिम्मा मंत्रालयिक कर्मचारी को सौंपा था। रिकॉर्ड जांच, सौंपे जिम्मा प्रशासनिक आदेश के बाद संबंधित कर्मचारी ने कार्यभार संभालने से पहले प्रशासनिक स्तर पर कमेटी बनाकर उसे सौंपे जा रहे रिकॉर्ड का खाका बनाने एवं हस्तंातरण की प्रक्रिया पूरी करने की मांग की थी।
इसके बाद से कमेटी की कार्यप्रणाली पर सुस्ती भारी है। दूसरी ओर इसी का फायदा उठाते हुए संबंधित कर्मचारी उसकी जिम्मेदारी से भी बच रहा है। समस्या यह भी है कि संबंधित बाबू के पास पहले से नर्सिंग कॉलेज की एक जिम्मेदारी है। उसे यह जिम्मेदारी अतिरिक्त व्यवस्था के तहत सौंपी गई है। कम पड़ रहे कमरे रिकॉर्ड रूम के नाम पर चिकित्सालय प्रशासन ने ५ कमरे और एक हॉल आवंटित किया हुआ है, जिसके भीतर वर्ष १९५५ से लेकर अब तक का रिकॉर्ड सुरक्षित है।
अस्थायी व्यवस्था के तहत पुराने रिकॉर्ड पूर्व में स्क्रीन वार्ड में रखे गए थे, जिसे बाद में स्वाइन फ्लू वार्ड में तब्दील करने के बाद यह रिकॉर्ड वापस से इसी बिल्डिंग में रखवा दिया गया। मजबूरी में बड़े रिकॉर्ड को ट्रोमा वार्ड के लेक्चरार हॉल में रखवाया गया है। बीते दो साल पहले लागू भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के बाद से रिकॉर्ड की बार-बार की जरूरतों से इसे संभालने की व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। जल्द करेंगे कार्रवाई संबंधित मंत्रालयिक कर्मचारी बीमारी के चलते भर्ती था। हाल ही में उसने ज्वाइनिंग दी है।
कमेटी पूरे रिकॉर्ड रूम की छानबीन के साथ ही उसे जिम्मेदारी सौंपेगी। फिलहाल व्यवस्था प्रभावित नहीं है, लेकिन जिम्मेदारी देना जरूरी है। डॉ. रमेश जोशी, उप अधीक्षक, एमबी हॉस्पिटल
Updated on:
05 Mar 2018 08:03 am
Published on:
05 Mar 2018 07:30 am
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