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इंदौर की तर्ज पर अब उदयपुर में भी मेडिकल वेस्ट संग्रहण, नगर निगम करेगा तीन तरह के कचरे का संग्रहण

शहर में सूखा और गीले कचरे का तो अलग-अलग डोर-टू-डोर संग्रहण हो रहा है, लेकिन अब मेडिकल वेस्ट भी एकत्र किया जाएगा

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इंदौर की तर्ज पर अब उदयपुर में भी मेडिकल वेस्ट संग्रहण, नगर निगम करेगा तीन तरह के कचरे का संग्रहण

उदयपुर . स्मार्ट सिटी इंदौर की तर्ज पर अब उदयपुर नगर निगम भी तीन तरह के कचरे का संग्रहण करेगा। वर्तमान में शहर में सूखा और गीले कचरे का तो अलग-अलग डोर-टू-डोर संग्रहण हो रहा है, लेकिन अब मेडिकल वेस्ट भी एकत्र किया जाएगा।

इंदौर दौरे पर गए महापौर चंद्रसिंह कोठारी ने सोमवार को तीसरे एवं आखिरी दिन इंदौर में डोर टू डोर कचरा संग्रहण प्रणाली, हैरिटेज वर्क और नाला विकास आदि कार्यों को समझा। उन्होंने बताया कि गाड़ी के पीछे एक टैंक होता है जिसमें मेडिकल वेस्ट अलग से एकत्र किया जाता है। विशेष बात यह है कि इंदौर में आमजन भी सफाईकर्मियों को पूरा सहयोग करते हैं। लोग तीनों तरह के कचरे को अलग-अलग छांट कर कचरा गाड़ी में डालते हैं। इसके अलावा इंदौर में ट्रेंचिंग एरिया में एनजीओ निगम के साथ मिलकर कचरे को छांटने का काम करता है। इससे रोजाना कई मजदूरों को रोजगार मिलता है। प्लास्टिक, कपड़े, रबड़ जैसे कचरे को हाथों हाथ कबाडिय़ों को बेच दिया जाता है। मजदूरों को तौल के आधार पर भुगतान कर दिया जाता है।

महापौर के साथ दौरे पर शामिल अतिरिक्त मुख्य अभियंता अरुण व्यास एवं एक्सईएन मनीष अरोड़ा भी थे। इन्होंने इंदौर में सॉलिड वेस्ट ट्रीटमेंट की टेण्डर प्रक्रिया एवं उसकी शर्तों को समझा ताकि उदयपुर में भी इसी तरह टेण्डर किया जा सके।

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हैरिटेज कार्य हमसे बेहतर नही......

महापौर ने बताया कि हैरिटेज को लेकर इंदौर में होल्कर छतरी पर काम देखा। यहां कुछ नया किया जा रहा है लेकिन जो काम उदयपुर नगर निगम ने जगदीश चौक लाइब्रेरी,कवंरपदा,नालीगली में किया है वैसा कार्य वहां देखने को नही मिला। अपने यहां हैरिटेज संरक्षण पर अच्छा कार्य हुआ है। इसके अलावा इंदौर मे पुराने दरवाजों को उसी रूप में कायम रखने पर ध्यान दिया गया है इस ओर उदयपुर मे भी फोकस रहेगा कि हमारी पुरानी विरासत कायम रहे।

नाले के किनारे पाथ वे अच्छा लगा.......

इंदौर मे भी उदयपुर की तरह आयड़ जैसी नदी है जो गंदे नाले का रूप ले चुकी है। इस पर इंदौर में रिवर फ्रंट के तहत काम हो रहा है। यहां पर बड़ी बात यह कि नादी के किनारे अतिक्रमण नही है जिससे पाथ वे गार्डन डवलप किए गए है। ऐसा उदयपुर मे आयड़ किनारे विकसित करने मे अभी समय लगेगा। उदयपुर मे आयड़ किनारे अतिक्रमण की समस्या ज्यादा है जिसको काफी हद तक हटाया है लेकिन लगातार प्रयास जरूरी है। इंदौर मे ओल्ड शहर के संकडे मार्गो को भी चौड़ा किया गया लेकिन उदयपुर मे व्यवहारिक रूप से संभव नही है।