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कुर्सी पर बैठ दो तहसीलदारों ने बेच दिया तालाब और पहाड़

कुर्सी पर बैठ दो तहसीलदारों ने बेच दिया तालाब और पहाड़

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मोहम्मद इलियास/उदयपुर

गिर्वा व बडग़ांव तहसीलदार द्वारा गलत आदेश जारी करने से फतहसागर के उपला तालाब में भूमाफिया ने मिट्टी डालकर पाट दिया तथा अंबेरी में एक अन्य भूमाफिया ने पहाड़ ही काट डाला। दोनों ही तहसीलदारों ने नियम विरुद्ध कार्य करते हुए यूआईटी व नगर निगम से भी अनुमति नहीं ली। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलक्टर ने दोनों तहसीलदारों को नियम विरुद्ध स्वीकृतियां जारी करने पर आरोप पत्र थमाते हुए उनसे 15 दिन में लिखित जवाब मांगा है।

राजस्थान पत्रिका के अंक में उपला तालाब पाटने पर अभियान चलाते हुए सिलसिलेवार खबरेंं प्रकाशित की गई थी। खबर प्रकाशित होने के बाद जिला कलक्टर ने गिर्वा तहसीलदार नरेन्द्र सिंह सोलंकी को नोटिस दिया था। अब कलक्टर उन्हें आरोप पत्र थमाया है। आदेश में कलक्टर ने स्पष्ट लिखा कि तहसीलदार सोलंकी ने राजस्व ग्राम सीसारमा में भूमि पर भूमि सुधार के लिए पणा व खाद डालकर समतलीकरण करने के आवेदन पत्र पर स्वीकृति जारी की थी। कलक्टर का कहना था कि नियमानुसार जिस भूमि की खुदाई की अनुमति दी जा सकती है उसमें संबंधित नगर विकास प्रन्यास एवं नगर निगम की सहमति आवश्यक होती है, जो नहीं ली गई। सहमति से बचने के लिए गलत नियम का हवाला दिया गया है। इसी प्रकार इस जमीन का कुछ हिस्सा झील के अधिकतम भराव क्षेत्र में स्थित है, जहां किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य अथवा अन्य कार्य अनुमत नहीं है। इस प्रकार स्वीकृति की आड़ मेंं जान बूझकर नियमों की अवहेलना कर तालाब पेटे के भराव की अनुमति दी गई है, जो कि गलत है।

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इसी तरह बडग़ांव तहसीलदार सुरेंद्र विश्नोई ने अंबेरी ग्राम में खातेदारी भूमि का समतलीकरण करने के लिए प्राप्त आवेदन पर स्वीकृति जारी की। यह स्वीकृति नियम 24 क से घ में राजस्थान काश्तकारी सरकारी नियम 1955 के तहत दी गई है तथा राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955 की धारा 66 से 68 का उल्लेख किया गया है। जिला कलक्टर का कहना है कि इस नियम में केवल भूमि की खुदाई की अनुमति दी जा सकती है, जो धारा 36 राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955 में वर्णित है तथा अन्य सभी भूमि सुधार तथा धारा 66.68 राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955 के तहत वर्णित भूमि सुधार की अनुमति राजस्थान काश्तकारी राजस्व मंडल नियम 1955 के नियम 25 क से च तक वर्णित नियमों के तहत दी जा सकती है, जिसमें संबंधित नगर विकास प्रन्यास एवं नगर निगम की सहमति आवश्यक होती है, जो इस मामले में नहीं ली गई है। सहमति से बचने के लिए गलत नियम का हवाला दिया गया है। उक्त नियमों में भूमि को समतल या सीढ़ीदार बनाने का प्रावधान लिखा है, जिससे स्पष्ट है कि खातेदार इसकी आड़ में पहाड़ नहीं काट सकता है। पहाड़ पर केवल सीढ़ीदार कृषि के लिए सुधार किया जा सकता है। इसी प्रकार स्वीकृति की अवधि समाप्त होने पर भी इस भूमि पर वर्तमान में भराव के लिए पत्थर व मिट्टी डाले जा रहे हैं, जो कि नियमानुसार नहीं है।

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उपला तालाब के मामले में अब तक नहीं दी रिपोर्ट

राजस्थान पत्रिका के 29 जनवरी के अंक में यूआइटी प्रशासन सोता रहा, भूमाफिया ने फिर भी मिट्टी से पाट डाला फतहसागर का उपला तालाब शीर्षक से खबर प्रकाशित की। इसके बाद अभियान चलाते हुए सिलसिलेवार खबरें प्रकाशित की थी। खबरों में तहसीलदार ने जिस तालाब में मिट्टी पाटने का दिया आदेश वह डूब क्षेत्र, हर साल भरता था बारिश का पानी भी खबर लगाई थी। खबर प्रकाशित होने के बाद जिला कलक्टर ताराचंद मीणा ने तहसीलदार गिर्वा नरेन्द्र सिंह सोलंकी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। नोटिस मिलते ही तहसीलदार का कहना था उन्होंने उपला तालाब में उपजाऊ मिट्टी भरने का कोई आदेश जारी नहीं किया, लेकिन अब तक पुलिस को रिपोर्ट नहीं दी।