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दशामाता का पूजन, सुख, समृद्धि और सौभाग्य मांगा

तड़के से ही मंदिरों में होने लगी पूजा-अर्चना, दोपहर तक चला दौर

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दशामाता का पूजन, सुख, समृद्धि और सौभाग्य मांगा

दशामाता का पूजन, सुख, समृद्धि और सौभाग्य मांगा

उदयपुर . हाथों में पूजा की थाली लिए सजी-धजी महिलाएं तड़के ही मंदिरों की ओर चल पड़ी। पीपल के वृक्ष की पूजा करने के साथ ही शिव-पार्वती की पूजा की और नल-दमयंती की कहानी सुनकर दशा माता से सुख-समृद्धि की कामना की और उनका धागा पहना। यह दौर तड़के से दोपहर तक जारी रहा।
यह नजारा शहर के हर गली-मोहल्ले में मौजूद पीपल के वृक्ष और मंदिरों के आसपास दिखाई दिया। दशामाता के पर्व को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह दिखाई दिया। मुहं अंधेरे ही महिलाएं लाल चूंदड़ी में सज-धजकर हाथों में पूजा की थाली लिए अलग-अलग दलों में आसपास के मंदिरों में पहुंच गई। मंदिरों में पीपल के वृक्ष की पूजा-अर्चना की। इसके तहत वस्त्र धराकर तने पर कच्चा सूत लपेटते हुए परिक्रमा की। इसके बाद शिवजी और पार्वती की पूजा की। नल-दमयंती की कहानी सुनी और दस कच्चे सूत के पीले तारों पर दस गांठे लगाकर तैयार किए गए धागे को गले में पहना। पूजा के बाद घर पहुंचकर महिलाओं ने मुख्य द्वार के दोनों ओर कुमकुम से स्वास्तिक बनाए।
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समृद्धि के लिए लाई पीपल की छाल
दशामाता की व्रत करने वाली महिलाओं ने पीपल के वृक्ष की पूजा के साथ ही तर्जनी उंगली से पीपल की छाल को तोड़ा और घर लाईँ। ऐसी मान्यता है कि इस छाल को तिजोरी और अलमारी में गहनों के साथ रखने से सोने में वृद्धि होती है।
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मोबाइल पर सुनी कथा
कई महिलाओं ने मोबाइल पर ऐप में कथा चलाकर सुनी और व्रत का विधान पूरा किया। ये महिलाएं दलों से अलग निकलकर मोबाइल पर कथा सुनती हुई दिखाई दी। यहां हुए आयोजन : पानेरियों की मादड़ी में मेनारिया समाज की महिलाओं ने बड़ा चौराहा स्थित ठाकुर जी के मंदिर के सामने, लकड़वास गांव में बड़ी संख्या में महिलाओं ने दशामाता पूजन किया, विद्या विहार कॉलोनी के मंगलेश्वर महादेव मंदिर में, बडगांव गांव स्थित लक्ष्मीनारायण मंदिर में महिलाओं ने पूजन किया।