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टाइगर टी-104 की मौत का मामला : एक दिन पहले पूर्ण स्वस्थ, मौत के बाद मल्टीपल ऑर्गन फेल?

शिफ्टिंग की प्रक्रिया पर खड़े हो रहे सवालएक्सपर्ट: रणथंभौर से 16 टाइगर शिफ्ट हुए, यह पहली मौत

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टाइगर टी-104 की मौत का मामला : एक दिन पहले पूर्ण स्वस्थ, मौत के बाद मल्टीपल ऑर्गन फेल?

टाइगर टी-104 की मौत का मामला : एक दिन पहले पूर्ण स्वस्थ, मौत के बाद मल्टीपल ऑर्गन फेल?

उदयपुर. रणथंभौर से उदयपुर लाए गए टाइगर टी-104 की मौत को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। वन विभाग के विशेषज्ञों और उच्चाधिकारियों की मौजूदगी में शिफ्टिंग ऑपरेशन होने के बावजूद महज 12 घंटे में टाइगर की मौत हो जाना किसी के गले से नहीं उतर रहा।

सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि एक दिन पूर्व वन विभाग ने टाइगर टी-104 के पूरी तरह से स्वस्थ्य होने का दावा किया था। वहीं दूसरे ही दिन मल्टीपल ऑर्गन फैल होने की बात कही जाने लगी। जानकारों का कहना है कि इस मामले में विभागीय अधिकारी अपनी गलतियों को ढंकने में जुटे हुए हैं। शिफ्टिंग के ऑपरेशन को पूरी तरह गुप्त रखने पर भी सवाल उठ रहे हैं।
ये सवाल छोड़ गई टी-104 की मौत
● टाइगर टी-104 रणथंभौर में करीब साढ़े तीन साल से कैज में था। इस दौरान वह बीमार पड़ा तो उसकी रिपोर्ट क्या रही?

● टाइगर को शिफ्ट करने की जानकारी को इतना गुप्त क्यों रखा गया?

● टाइगर की मृत्यु के बाद भी देर शाम तक उदयपुर के अधिकारी इसकी जानकारी छिपाते रहे?

● टाइगर को तीन बार बेहोशी की दवा देने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

● बंद गाड़ी में लाया गया टाइगर होश में था या बेहोशी में ही उठा लाए?

● रात को मॉनिटरिंग के लिए टीम क्यों नहीं लगाई गई?

● टाइगर को बेहोश करने से लेकर गाड़ी में शिफ्ट करके बॉयोलोजिकल पार्क में उतारने तक के फोटो, वीडियो आदि बनाए गए या नहीं।

सेवानिवृत्त डीएफओ दौलत सिंह शेखावत ने बताया कि रणथंभौर से अब तक 16 से अधिक टाइगर को शिफ्ट किया गया है। यह पहला मामला है, जब किसी टाइगर की मृत्यु हुई हो। वहां टाइगर एक हेक्टेयर क्षेत्र के बाड़े में रहता है। ऐसे में उसके इंफेक्टेड होने की पूरी संभावना है। इसका पता खून की जांच में ही चल सकता है। टाइगर को शिफ्ट करने से पूर्व सेंपल लिया जाता है। इसके साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद उसकी मौत के असली कारणों का पता चल सकेगा। किसी भी टाइगर को शिफ्ट करने से पूर्व ट्रेंक्यूलाइज किया जाता है। इसके बाद उसे रिवाइव ऑन देकर पूरी तरह होश में लाया जाता है। इसके बाद शिफ्टिंग की कार्रवाई होती है। इस दौरान उसकी हार्ट बीट, टेंपरेचर, कितनी देर में बेहोश हुआ, दूसरा और तीसरा डोज देने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इसकी जानकारी भी दर्ज की जाती है।