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आचार्य शांतिसागर ने जीवन भर आत्मा की उन्नति का उद्यम किया

प्रथमाचार्य शांतिसागर के 151वें अवतरण वर्ष पर प्रवचन और गुणानुवाद सभा हुई

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आचार्य शांतिसागर ने जीवन भर आत्मा की उन्नति का उद्यम किया

आचार्य शांतिसागर ने जीवन भर आत्मा की उन्नति का उद्यम किया

उदयपुर. गायरियावास संतोष नगर स्थित दिगंबर जैन मंदिर के सभागार में शुक्रवार को प्रथमाचार्य शांतिसागर के 151वें अवतरण वर्ष पर प्रवचन और गुणानुवाद सभा हुई। इसमें आचार्य वर्धमान सागर ने उनके जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला।आचार्य वर्धमान सागर ने बताया कि जिस प्रकार एक उद्योगपति व्यापार में भौतिक संसाधनों का संचय करता है, उसी प्रकार आचार्य शांतिसागर ने भी आध्यात्मिक उद्यमी बन कर जीवन पर्यंत गृहस्थ अवस्था से मुनि अवस्था तक विषय भोगों के प्रति अनासक्त रह कर आत्मा की उन्नति का उद्यम किया। वर्तमान की साधु परंपरा उनकी ही देन है। मंच संचालन प्रकाश सिंघवी ने किया।

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जीवन का हर पल अनमोल है
उदयपुर. श्रमण संघीय उप प्रवर्तनी शांता कुंवर, मंगलप्रभा व नयन प्रभा शुक्रवार को अशोक नगर से विहार कर सौ फीट रोड पहुंची। वहां साध्वियों ने धर्मसभा को संबोधित किया।विहार के बाद धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन बहुत छोटा है, जीवन का हर पल अनमोल है। अतः सचैत हो कर कार्य के साथ आत्म साधक भी बने। इस अवसर पर विनोद राय सोनी, हेमंत भंडारी, राजेंद्र खोखावत, अनील सियाल, नरेंद्र सिंघवी, प्रमोद चपलोत आदि मौजूद थे।


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