
भुवनेश पंड्याा/ उदयपुर . मेवाड़ की धरा शिक्षा के मामले में शुरू से सिरमौर रही है। गुरुकुल परम्परा के बाद शहर में पहला स्कूल वर्तमान जगदीश चौक स्कूल में खुला जिसे महाराणा का स्कूल कहते थे। इसमें छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग अध्ययन की व्यवस्था थी। कालांतर में कई स्कूल खुले और आज शिक्षा जगत में उदयपुर की विशिष्ट पहचान है। शिक्षाविद् विद्याभवन पॉलिटेक्नीक कॉलेज के प्राचार्य अनिल मेहता ने बताया कि राजस्थान महिला परिषद के नाम से वर्ष 1916 में एक स्कूल खुला। खास बात यह थी कि यह कन्या पाठशाला थी। उस समय में छात्राओं के लिए अलग विद्यालय होना कोई साधारण बात नहीं थी। इसी प्रकार बीएन (भूपाल नोबल्स) स्कूल की शुरुआत महाराणा भूपालसिंह ने 1923 में की थी। प्राथमिक विद्यालय से हुई शुरुआत आज विश्वविद्यालय का स्वरूप ले चुकी है।
देश जिस समय आजादी की लड़ाई लड़ रहा था, उस समय मेवाड़ राजघराने से लेकर यहां के वरिष्ठजनों की दूरदर्शिता शिक्षा पर केन्द्रित थी। वे चाहते थे कि जब देश आजाद होगा, तब अच्छे पढ़े-लिखे दिमाग की जरूरत होगी। इसी क्रम में विद्याभवन स्कूल की शुरुआत 1931 में हुई।राज्य का पहला शिक्षक प्रशिक्षण स्कूल विद्या भवन में 1942 में खोला गया, यह ना केवल उदयपुर बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात थी।
वर्तमान स्थिति
वर्तमान में मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय, जर्नादनराय नागर विवि, पेसिफिक विवि, गीताजंलि विवि, भूपाल नोबल्स विवि, महाराणा प्रताप विवि, पद्मपद सिंघालिया विवि संचालित है। इन विवि से कई कॉलेज सम्बद्ध हैं। वर्तमान में कई बड़े सरकारी व निजी नामचीन स्कूल यहां संचालित हैं।
बदलती रही तस्वीर
पंडित जनार्दन राय नागर ने 1937 में राजस्थान विद्यापीठ की स्थापना की। नौकरीपेशा या दिन में काम करने वाले रात को इसमें पढ़ाई कर सकते थे। उस समय से ही प्रौढ़ शिक्षा की नींव डाली गई।
1956 में माणिक्यलाल वर्मा श्रमजीवी कॉलेज की स्थापना की गई।
1956 में विद्याभवन ने रूरल एंड सेनिटेशन इंजीनियरिंग कॉलेज की शुरुआत की।
सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय 1962 में खुला। तब से अब तक ये दक्षिणी राजस्थान में उच्च शिक्षा का केन्द्र है। 1964 में एमबी कॉलेज की शुरुआत हुई।
Published on:
18 Apr 2018 03:52 pm
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