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उदयपुर के युवाओं ने बनाया ऐसा उत्पाद, जो कम पानी में खेती को बनाएगा आसान

सायनिक उर्वरकों पर अधिक निर्भरता, पानी की कमी, प्रदूषण, कृषि-अपशिष्ट प्रबंधन और अपशिष्ट जलाने की स्थितियों सहित अहम कृषि और पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान करने वाला है।

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World Earth Day 2025: बढ़ती आबादी, घटते संसाधन चिंता बढ़ा रहे हैं। सबसे ज्यादा समस्या पानी की कमी और प्रदूषण की देखने में आ रही है, जो पृथ्वी और मानव जाति के लिए बड़ा खतरा बन रही है। इन्हीं समस्याओं का समाधान खोजने के लिए युवा तेजी से काम कर रहे हैं। उदयपुर के युवाओं ने कुछ ऐसा ही उत्पाद बनाया है, जो कम पानी में खेती को आसान बनाएगा। उदयपुर की डॉ. सुमन और विजय त्रिवेदी ने नर्चरिंग तत्वास एग्रोकेयर स्टार्टअप की शुरुआत की।

जो रासायनिक उर्वरकों पर अधिक निर्भरता, पानी की कमी, प्रदूषण, कृषि-अपशिष्ट प्रबंधन और अपशिष्ट जलाने की स्थितियों सहित अहम कृषि और पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान करने वाला है। इनकी ओर से तैयार उत्पाद खारे पानी और बंजर जगहों पर भी खेती को आसान बनाता है। इसमें कोटिंग सामग्री, सुपर अब्जोर्बेंट हाइड्रोजेल और एक्वा-न्यूट्रिएंट मैट्रिक्स शामिल है। यह पारंपरिक उर्वरकों और रसायनों से जुड़े लीचिंग, वाष्पीकरण और जलने के जोखिमों को कम करने के लिए बेहतर काम करते हैं।

उद्देश्य, जिसने दी दिशा

● संधारणीय कृषि पद्धतियों के बारे में जागरूकता लाना, जैविक और पर्यावरण के अनुकूल खेती की ओर बदलाव की सुविधा प्रदान करना।

● कृषि इको सिस्टम में जरुरी सूक्ष्म जीवों को फिर से लाने के साथ ही हवा, पानी और मिट्टी के अहम तत्वों को फिर से भरने का काम करना।

सिंचाई की जरुरत होगी आधी

नवाचार में 100 प्रतिशत प्राकृतिक, बायोडिग्रेडेबल हाइड्रोजेल-आधारित जैव-पोषक मैट्रिक्स है, जो पानी की कमी और प्रदूषण से निपटने के लिए कृषि-अपशिष्ट का उपयोग करता है। इस विधि में रसायनों पर निर्भरता को 70 प्रतिशत तक कम करने, मिट्टी के स्वास्थ्य को महत्वपूर्ण रूप से बेहतर बनाने की क्षमता है और सिंचाई की जरुरत आधी करता है।