
Patrika Exclusive : अगर शोध में चोरी की तो ‘लटकेगी’ नौकरी पर तलवार, यूजीसी ने सख्त किए नियम..
भुवनेश पंड्या/ उदयपुर. अब किसी भी विद्यार्थी की ओर से शोध यानी पीएचडी के लिए लिखी गई थीसिस कोई भी कार्मिक या विद्यार्थी चुराएगा तो इसका खमियाजा नौकरी गंवा कर चुकाना होगा। साथ ही यदि किसी भी विद्यार्थी में यह बात सामने आती है तो उसका रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा। यूजीसी ने नियमों को सख्त करते हुए हाल में ये आदेश जारी किए हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय तक निजी कॉलेजों से लेकर निजी विश्वविद्यालयों की लगातार शिकायतों के बाद यूजीसी ने नियम सख्त कर दिए हैं।
यूजीसी की ओर से पारित नए नियमों के मुताबिक थीसिस में प्लेगरिज़्म यानी साहित्य चोरी पाए जाने, डिग्री मिलने की स्थिति में तीन स्तर पर कार्रवाई होगी, इसमें पहले सामान्य मामले पर चेतावनी, दूसरे स्तर पर शिक्षकों की वेतन वृद्धि रुकेगी और बड़े स्तर पर नौकरी जाएगी। साथ ही नए छात्रों के सुपरविजन के अधिकार भी उससे ले लिए जाएंगे।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने नए नियमों को मंजूरी दी है, इसमें यदि कोई शोधार्थी रिसर्च में प्लेगरिज्म का दोषी पाया जाता है तो उसका पंजीकरण रद्द होगा। उच्चतर शिक्षा संस्थानों में अकादमिक सत्यनिष्ठा और साहित्य चोरी की रोकथाम को प्रोत्साहन विनियम- 2018 को इस सप्ताह अधिसूचित कर दिया है।
ये रहेगी व्यवस्था
- 10 प्रतिशत तक प्लेगरिज्म पर किसी दंड का प्रावधान नहीं है, जबकि 10 से 40 प्रतिशत के बीच छह महीने के भीतर संशोधित शोधपत्र पेश करना होगा। इसी तरह 40 से 60 प्रतिशत समानताएं मिलने पर छात्रों को एक साल के लिए संशोधित पेपर जमा करने से रोक दिया जाएगा। इससे ऊपर के मामले में पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा।
इस नियम के तहत अध्यापकों के लिए भी दंड का प्रावधान है। उनके शोध में 10 से 40 प्रतिशत समानता पर मैनुस्क्रिप्ट वापस लेने को कहा जाएगा।
- इससे अधिक चालीस से 60 प्रतिशत समानता पर 3 वर्ष के लिए पीएचडी छात्र का सुपरविजन करने से रोक दिया जाएगा। दो वार्षिक वेतन वृद्धि के अधिकार से वंचित किया जाएगा। साठ से अधिक समानता पर उनके खिलाफ निलंबन या सेवा समाप्ति हो सकती है।
सख्ती जरूरी है
यूजीसी ने मापदण्ड कड़े कर दिए हैं। शोध की चोरी बहुत गंभीर विषय हैं। इसमें तीन स्तरीय कार्रवाई का प्रावधान है। इसमें छोटेा मसले में चेतावनी, फिर वेतन वृद्धि रोकने और अन्त में नौकरी जाने तक का निर्णय होगा। विद्यार्थियों को तो इस स्थिति को पूरी तरह से समझना ही होगा कि उनका पंजीयन निरस्त हो सकता है। सॉफ्टवेयर हर स्थिति को पकड़ लेगा।
जेपी शर्मा, कुलपति, मोहनलाल सुखाडिय़ा विवि उदयपुर
Published on:
07 Aug 2018 01:34 pm
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