
उदयपुर. शहर में करोड़ों रुपए खर्च कर यूआईटी, नगर निगम, स्मार्ट सिटी सडक़ें बनाती है लेकिन कुछ सडक़ों पर कुछ टुकड़ों में ऐसा पेच फंसे कि आज कई साल निकलने आए लेकिन उन सडक़ों के जख्म ठीक नहीं किए है। इनमें अधिकांश मामले विवाद के चलते कोर्ट-कचहरी में है लेकिन सालों निकलने के बाद भी उनके निस्तारण को लेकर तेजी इन एजेंसियों में नहीं देखी गई। शहर में सडक़ों के जाल बिछाने का काम हो गया और ऐसी प्रमुख सडक़ों पर कुछ हिस्से में विवाद के चलते कच्ची एवं उबड़-खाबड़ सडक़ ने लोगों को परेशान कर रखा है। वहां से गुजरने वालों और आसपास रहने वालों को धूल के गुब्बार झेलना मजबूरी हो गई है। प्रभावित जनता का भी कहना है कि यह बात सही है कि मामले कोर्ट में चल रहे है लेकिन कोर्ट में सार्वजनिक हित से जुड़े इस मामले में मजबूती से पक्ष रखकर इन मामलों का निस्तारण कराना चाहिए।
1. बेड़वास की मेगा आवास तक की सडक़बेड़वास मुख्य सडक़ से अंदर मेगा आवास योजना तक जानी वाली सडक़ कनेक्ट कर दी गई। माउंट व्यू स्कूल से थोड़ा आगे से मेगा आवास की तरफ कुछ टुकड़ा अधूरा पड़ा है। इस मार्ग से इन आवास में और नाकोड़ा नगर क्षेत्र में बड़ी संख्या में रहने वाली लोग निवासरत है।
2. हिरणमगरी सेक्टर 3 से बीएसएनएल हिरणमगरी सेक्टर तीन की मुख्य सडक़ से बीएसएनएल जाने वाली सडक़ का टर्न पर कुछ भाग अधूरा है। बरसों से ये सडक़ ऐसी है, एक तो टर्न और ऊपर से कच्चा भाग, आगे पूरी डामर सडक़ है। हिरणमगरी सेक्टर तीन, चार एवं मादड़ी इंडस्टीयल एरिया को जोडऩे वाली है ये सडक़।
3. माली कॉलोनी-सब सिटी सेंटर लिंक रोड कुम्हारों का भट्टा से हिरणमगरी वाली नई सडक़ से माली कॉलोनी-शिवा नगर होकर सब सिटी सेंटर को लिंक करने वाली मुख्य सडक़ बीच में अधूरी पड़ी है। ये सडक़ बनी तब से यही स्थिति है।
4. माली कॉलोनी-टेकरी लिंक रोड कुम्हारों का भट्टा से माली कॉलोनी होकर टेकरी को लिंक करने वाली मुख्य सडक़ जेसी बोस के पास अधूरी पड़ी है। इस सडक़ पर भी ट्रेफिक बढ़ गया है। 5. नवरत्न कॉम्पलेक्स में नवरत्न कॉम्पेक्स में सरकारी स्कूल के सामने सीधी जो 100 फीट सडक़ निकल रही है वह दो जगह अटकी पड़ी है। मामला कोर्ट में होने से करीब सात साल से कच्ची बनी हुई है।
-जनता से जुड़े मुद्दों पर बीच के रास्ते निकालने चाहिए
पूर्व पार्षद तथा यूआईटी व नगर निगम के अधिवक्ता मनीष श्रीमाली कहते है कि जनता से जुड़े ऐसे सार्वजनिक मुद्दों पर लोक अदालत या संबंधित मूल पार्टी के साथ बैठकर बीच का रास्ता निकालना चाहिए। वे कहते है कि ऐसे प्रकरण को सुलझाने के लिए बीच का रास्ता जरूर निकालना चाहिए क्योंकि कई प्रकरण सालों तक चलते रहते है।
इनका कहना है....
मामले कोर्ट में चल रहे है, कुछ में आपसी विवाद है जिसमें यूआईटी को भी पार्टी बना रखा है। इस मामले में हम एक-एक को बुलाकर चर्चा करते है और रास्ता निकलवाते है। हमारी अन्य सडक़ों के विषय भी इसमें शामिल कर लेंगे। इसके बाद भी बात नहीं बनती है तो माननीय कोर्ट के समक्ष हमारी बात रखेंगे।
- अरुण कुमार हासिजा, सचिव यूआईटी
Published on:
18 Aug 2021 11:37 am
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