
mongolian crane bird
उमेश मेनारिया/मेनार. वेलेंटाइन डे पर अक्सर इंसानी प्रेम के उदाहरण दिए जाते हैं लेकिन पक्षियों की बात की जाए तो नि:स्वार्थ प्रेम और सुखद गृहस्थ जीवन का उनसे अच्छा उदाहरण कहीं ओर देखने को नहीं मिलेगा। हम बात कर रहे हैं सारस की या कहें क्रेन, क्रोंच व सारस पक्षी की..जिसे किसानों का मित्र भी कहा जाता है। ये पक्षी जीवन में एक ही बार जोड़ा बनाता है और जीवनभर एक ही साथी के साथ जीवन व्यतीत करता है। इनका प्यार इतना गहरा होता है कि ये एक-दूसरे के बिछोह में जान तक दे देते हैं।
सारस पक्षी का संबंध रामायण से है
वाल्मीकि ने रामायण लिखने का आरंभ सारस पक्षी के वर्णन से ही किया था। प्रणयरत सारस पक्षी युगल में से एक की शिकारी द्वारा तीर से हत्या कर दी जाती है तो दूसरा अपने साथी के वियोग में वहीं तड़प कर प्राण त्याग देता है। इस घटना से द्रवित होकर महर्षि उस शिकारी को श्राप देते हैं और वही पंक्तियां रामायण के प्रथम श्लोक के रूप में लिपिबद्ध होती हैं। सारस युगल को पवित्र और सौभाग्यदायक पक्षी के रूप में मान्यता मिली हुई है और इस पक्षी का वर्णन लोककथाओं और लोक गीतों में मिलता रहता है।
इनके प्रणय का आरंभ नृत्य से होता है
इनके प्रणय का आरंभ नृत्य से होता है। नृत्य के आरंभ से पहले ये पक्षी अपनी चोंच को आसमान की ओर कर के विशेष तीव्र ध्वनियां निकालते हैं। इस प्रणय ध्वनि का आरंभ मादा करती है और नर की प्रत्येक अपेक्षाकृत लंबी ध्वनि के उत्तर में दो बार छोटी ध्वनियां निकालती है। ध्वनि के समय नर अपनी चोंच और गर्दन को आसमान की तरफ सीधा रखता है और पंखों को फैलाता है। मादा केवल गर्दन और चोंच को सीधा रखती है और ध्वनि निकालती है। इनका प्रणय नृत्य आकर्षक होता है। ये पंखों को फ डफ़ ड़ा के अपने स्थान पर कूद के और थोड़ी दूरी तक गोलाई में दौड़ कर और छोटे घास एवं लकडिय़ों को उछाल कर पूरा करते हैं।
खतरे में है सारस की प्रजाति
बर्ड विलेज मेनार के धन्ड तालाब एवं ब्रह्म सागर के केचमेंट क्षेत्र माल कृषि विशेष क्षेत्र में इस साल आस पास खेतों में करीब 8 जोड़े देखे गए हैं। वहीं एक जोड़े के साथ नन्हे सारस को भी देखा गया । उडऩे वाले पक्षियों में सारस सबसे बड़े पक्षियों की श्रेणी में आता है। जब ये खड़े होते हैं तो इनकी औसत ऊंचाई 5 से 6 फ ुट तक होती है। इनका औसतन वजऩ करीब 6.35 होता है। उड़ते समय इनके पंखों का फैलाव 1.5 से 2 मीटर तक चला जाता है। भारत में सारसों की संख्या दिन प्रतिदिन घट रही है । जंगलों की लगातार हो रही कमी, खेतों में किया जा रहा कीटनाशकों का छिडक़ाव, शिकार, बदलता पर्यावरण, चूज़ों की तस्करी सारसों के खत्म होने का कारण बनते जा रहे हैं। जंगली बिल्लियां और लोमडिय़ा कभी-कभी इनके बच्चों को उठाकर ले जाती हैं। वैसे आकार में बड़ा होने के कारण इन्हें कौवे और चील जैसे शिकारी पक्षियों से कोई खतरा नहीं है लेकिन जंगली कुत्तों के झुंड में ये अपने आपको असहाय पाते हैं।
इनका कहना है..
राजस्थान में 4 तरह की सारस की प्रजाति पाई जाती हैं । सारस पक्षी का अपना विशिष्ट धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व है । ये जीवन में एक ही जोड़ा बनाते हैं । दोनों मिलकर जमीन पर घोंसला बनाते हैं । आमतौर पर एक या 2 अंडे देते हैं इसमें से अक्सर एक ही बच्चा जीवित रहता है । अधिकतर स्थानों पर बुजुर्गोंं द्वारा दम्पतियों को सारस जैसी जोड़ी बनी रहे, ऐसा आशीर्वाद दिया जाता है। यदि किसी कारण से एक साथी की मृत्यु हो जाती है तो दूसरा बहुत सुस्त होकर खाना पीना बंद कर देता है जिससे प्राय: उसकी भी मृत्यु हो जाती है। इसलिए इस पक्षी को प्रेम और समर्पण का प्रतीक मानते हैं। इनकी संख्या अब घटती जा रही है जिसे बचाना आवश्यक है।
डॉ. सतीश शर्मा, वन्य जीव विशेषज्ञ
Published on:
14 Feb 2019 03:31 pm
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