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आयड़ तीर्थ में अति प्राचीन प्रतिमाएं आस्था का केंद्र

पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व पर विशेष

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आयड़ तीर्थ में अति प्राचीन प्रतिमाएं आस्था का केंद्र

आयड़ तीर्थ में अति प्राचीन प्रतिमाएं आस्था का केंद्र

उदयपुर . शहर के मध्य श्वेतांबर जैन समाज का आयड़ तीर्थ अतिप्राचीन होने से प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में अपनी पहचान रखता है। ऐसा उल्लेख मिलता है कि इस मंदिर में स्थापित भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा को आचार्य यशोभद्र सूरि ने वि.स. 1029 में स्थापित करवाया था। इसी प्रकार इस क्षेत्र में स्थापित अन्य मंदिरों की प्रतिष्ठा विस. 12वीं सदी की मानी जाती है। मूल मंदिर में श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ भगवान का मंदिर है। यह मूल प्रतिमा है या नहीं इसको लेकर अलग-अलग मत हैं। मूल प्रतिमा को उत्थापित करके इसके स्थान पर शंखेश्वर पार्श्वनाथ भगवान की 41 इंच ऊंची श्वेत पाषाण प्रतिमा विराजित करवाई गई है। इसका परिकर 69 इंच ऊंचा है। इस पर कोई लेख नहीं है, लेकिन यह प्रतिमा काफी प्राचीन बताई जाती है।
शंखेश्वर पार्श्वनाथ भगवान की 41 इंच ऊंची श्वेत पाषाण प्रतिमा
खुदाई में निकली प्रतिमा की तपा गच्छाधिपति जय घोष सूरीश्वर के शिष्य जितेंद्र सूरीश्वर व कुलचंद्रसूरि के सान्निध्य में 11 मार्च 2002 को प्रतिष्ठा करवाई गई। निज मंदिर से बाहर निकलते समय फेरनी में कारनिस पर दाएं से बाएं श्वेत पाषाण की 21 इंच ऊंची अलग-अलग भगवान की 25 प्रतिमाएं है। इसके साथ ही 27 इंच की 24 प्रतिमाएं भी यहां मौजूद है। मंदिर में कुल 111 प्रतिमाएं स्थापित हैं। इनमें से 31 प्रतिमाएं अति प्राचीन है। इस मंदिर में पांच प्रतिमाएं मूलनायक भगवान की है। इनमें शंखेश्वर पार्श्वनाथ, आदिनाथ भगवान, वासुपूज्य भगवान, महावीर स्वामी, शांतिनाथ भगवान की प्रतिमाएं भी यहां स्थापित है। प्रतिमाओं को स्थापित करने वाले परिवारों का नाम भी अंकित है। आयड़ तीर्थ के आसपास कई प्राचीन मंदिर भी स्थापित है।