उदयपुर शहर के करीब काया गांव के सरकारी स्कूल में काम करने वाली इशरत बानो, जिसने बच्चों और शिक्षकों से कभी धर्म भेद नहीं किया। उसने काम के साथ सौहार्द भाव से स्कूल परिसर में स्थित सरस्वती और शिव मंदिर की व्यवस्था भी संभाली। कभी यह भाव नहीं रखा कि वह मुस्लिम है, मंदिर का काम कैसे कर सकती है। इसी का नतीजा रहा कि स्कूल ही नहीं, पूरा गांव उसे बेटी जैसा प्यार देने लगा। आखिर इस बेटी के हाथ पीले हो गए। इस मौके पर शिक्षकों और ग्रामीणों ने उसे ढेरों उपहार के साथ विदा किया। बेगानों से अपनों जैसा प्यार पाकर इशरत बानो की आंखें छलक गई।
वाकया काया गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का है। सोमवार को यहां निकाह जैसा नजारा पेश आया। यहां अस्थाई रूप से काम करने वाली इशरत बानो का निकाह हाल ही में उज्जैन निवासी सलीम से हुआ। इशरत जब सलीम के साथ स्कूल पहुंची तो शिक्षक ही नहीं, बच्चों के भी चेहरे खिल उठे। विद्यालय परिवार ने ढेरों उपहार के साथ इशरत और सलीम को विदा किया। इससे पहले स्कूल में ही दोनों की वरमाला की रस्म भी कराई गई। नजारा देख सभी खुश थे, लेकिन इशरत की आंखों से खुशी के आंसू बह निकले।
उज्जैन में निकाह से चर्चा
इस मौके पर मौजूद हर शख्स की जुबां पर एक ही बात थी कि इशरत बानो सरस्वती और शिव मंदिर में तन्मयता से सेवा-पूजा करती थी, इसलिए महादेव की नगरी उज्जैन के भले परिवार में उसका निकाह हुआ। उज्जैन स्थित विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कार्मिक सलीम खान से इशरत का निकाह हुआ। सरल स्वभाव के सलीम भी स्कूल परिवार से मिले प्यार से बेहद खुश थे।
विद्यालय परिवार ने दिखाई समरसता
प्रधानाचार्य मोहनलाल मेघवाल ने बताया कि विद्यालय परिवार ने सामाजिक समरसता की मिसाल पेश कर इशरत बानो को भी पूरा सम्मान दिया। इस दौरान शिक्षक चन्द्रशेखर परमार, जयन्त चौबीसा, लक्ष्मी बनकर, शशिकला जैन, शुभा धर्मावत, चन्द्रकला वर्मा, शारदा गौड़, माया परिहार, शंकर लाल मीणा, रविराज चौबीसा, नंदकिशोर देव, रेणुका पण्ड्या, सीमा पटियात, मैना जैन, रेखा जैन, सुगना डामोर, जल्पना सिंह, लोकेश जैन, पुष्पा डामोर, भगवानलाल गुर्जर, शारीरिक शिक्षक घनश्याम खटीक मौजूद थे।