
पानी पर विशेष रिपोर्ट : पानी की पुकार, घुट रहा है मेरा दम
संदीप पुरोहित
शहर की जगप्रसिद्ध पिछोला, फतहसागर व उदयसागर झीलों को वर्षभर भरने के लिए राज्य सरकार ने जहां देवास सहित कई बड़े प्रोजेक्ट के कार्यों को गति देते हुए करोड़ों रुपए किए हैं, वहीं इनके केचमेंट व पानी के बहाव क्षेत्र में लगातार कब्जे हो रहे हैं। झीलाें में आने वाले पानी का जगह-जगह दम घोंटा जा रहा है। नदी, नालों व नहरों में भूमाफिया व अतिक्रमी लगातार कब्जा कर रहे हैं। कई जगह बहाव क्षेत्र में उन्होंने भूखंड काट डाले तो कई जगह मकान बनाकर पानी को ही रोक दिया। पिछोला को भरने वाली सीसारमा में मिलने वाली अमरजोक नदी को छोटा कर दिया तो फतहसागर में आने वाले पानी को कई जगह रोक दिया गया। इतना ही नहीं आयड़ (बेदला) नदी में गिरने वाला नाला ही गायब हो गया। यह सब एक दिन में नहीं हुआ। झीलों में आने वाले पानी के रास्ते में हो रहे अतिक्रमण को लेकर पेश है विशेष रिपोर्ट...
अमरजोक नदी को कर दी छोटी, रसूखदारों के आगे सब मौन
नाई के कोड़ियात गांव में नवनिर्मित पांच सितारा रिसोर्ट के संचालकों को लाभान्वित करने के लिए प्रशासन ने अमरजोक नदी में कानूनी दावपेंच खेल बहाव क्षेत्र को ही कम कर दिया। मिट्टी का भराव डालकर यहां 60 फीट पक्का रास्ता निकाल दिया, वहां गांव वालों की कच्ची पगडंडी की जगह होटल में आने वाले लोगों की लग्जरी गाड़ियां दौड़ रही है। कभी राजस्व रिकॉर्ड में अमरजोक नदी का खसरा नम्बर 106, 198 व 199 में था। इसमें 0.9 हैक्टेयर कदमी रास्ता था, जो महज 4.5 फीट चौड़ा व करीब 800 मीटर लम्बा था। 2014 तक इस पगडंडी रास्ते से लोग सिर्फ खेतों में आते-जाते थे। तेज बहाव में होने पर वे नहीं निकल सकते थे। 2015 में एक निजी कंपनी ने यहां जमीन खरीदी। उसके बाद जल संसाधन विभाग ने देवास टनल का गेज नापने के लिए पुलिया बना दी। वहां पुलिया के आगे महज 10 फीट चौड़ा रास्ता था, जिसे 40 फीट मार्ग कर दिया गया। मलबा डालने नदी के बहाव क्षेत्र की चौड़ाई कम हो गई। एक के बाद एक कई सरकारी अधिकारियों ने कानून की परिधि में ऐसा खेल खेला कि उदयपुर अपने आपको आज ठगा महसूस कर रहा है।
अमरजोक नदी में पहले पगडंडी कच्चा रास्ता था। नदी में भराव डालकर पक्की रोड बना दी और नदी की तरफ तारबंदी कर दी। मौके पर गार्ड तैनात कर दिए और अब वहां किसी को आने-जाने भी नहीं देते हैं। उन्होंने वहां पर अपना निजी रास्ता बना दिया।
- डाडमचंद नागदा, बूझड़ा गांव मोतबिर
कई गांव का पानी आकर मिलता है नदी में
पिछोला को भरने वाली सीसारमा में नांदेश्वर व अमरजोक नदी से पानी आता है। रायता, पीपलिया व आसपास के केचमेंट से पानी कोड़ियात में अमरजोक नदी में बहता हुआ बूझड़ा में गिरता है। इस नदी में देवास प्रोजेक्ट का पानी भी इसी रास्ता से आता है। कोड़ियात में पांच सितारा होटल के व्यवसायी ने यहां भराव डालकर पगडंडी को 60 फीट रोड बना दी।
खातेदार ने नाले पर निकाला रास्ता, शासन प्रशासन सब बेखबर
बरोड़िया में प्राकृतिक नाले में चल रहा निर्माण कार्य। बड़गांव पंचायत समिति के बरोड़िया गांव में एक खातेदार ने प्राकृतिक नाले के ऊपर से रास्ता निकाल दिया। वहां अभी खातेदार अपनी जमीन पर रास्ता नहीं होना बताकर नाले में ब्राउण्ड्री का निर्माण करवा रहा है और उसे देखने वाला कोई नहीं है। बरोड़िया स्थित इस प्राकृतिक नाले में पानी रामा, इसवाल गांव की पहाड़ियों व उसके आसपास के क्षेत्र से आता है। यहां से पानी बरोड़िया नाले से होकर थूर से चिकलवास व मदार नहर में होता हुआ फतहसागर में गिरता है। अभी बरोड़ियों में नाले में मिट्टी के बीच तीन पाइप डालकर रास्ता निकाल दिया गया और वहां पर बाउण्ड्री का युद्ध स्तर पर काम जारी है। पत्रिका ने जब इस बारे में प्रशासन से जानकारी मांगी तो उन्होनें इस बारे में अनभिज्ञता जाहिर की। बेखर प्रशासन की आड़ में बरोड़िया में अभी कतिपय लोगों ने एक जगह नहीं, बल्कि दो जगह रास्ते निकालते हुए नाले में भराव डाल दिया। नाले के ही अंदर ही ब्राउण्ड्रीवॉल का निर्माण करवाया जा रहा है।
स्वयं को खातेदार बताया
मौके पर काम करवाने वाले लोगों ने स्वयं को खातेदार बताते हुए कहा कि जमीन पर आने-जाने का रास्ता नहीं होने से उन्होंने पाइप डालकर रास्ता निकाला, इसमें अगर पानी का बहाव तेज हुआ और पाइप डालकर उसे बड़ा कर देंगे। इसके अलावा वे नक्शे के अनुसार ही नाले पर बाउण्ड्री का निर्माण करवा रहे हैं, लेकिन इसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं दी है।
बरोड़ियों में प्राकृतिक नाले में निर्माण हो रहा है ,इसके बारे में जानकारी नहीं है। प्रशासन व जलसंसाधन विभाग को सूचना दिए बगैर काम नहीं करवाया जा सकता है। मौका दिखवाकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
- शिवन्या गुप्ता, तहसीलदार बड़गांव
आयड़ में गिरने वाले नालों को ही कर दिया गायब, मलबे से पाट डाला
बेदला में भराव डालकर पाटा गया नाला। बेदला गांव में आयड़ नदी में गिरने वाले नालों को ही भूमाफियाओं ने अतिक्रमण कर पाट डाला। नालों पर कई जगह पर दुकानें व मकान बन गए तो कुछ जगह पर भूखंड काटते हुए अतिक्रमण किया जा रहा है। प्रशासन इस इलाके के बारे में जानकर भी पूरी तरह अनजान है। ब्राह्मणाें का गुड़ा रोड व पुरानी शिकारवाड़ी (बेदला) के सामने से करीब 15 फीट नाला बेदला सापेटिया रोड होते हुए बीजी नगर, समतानगर, भिक्षुनगर, मानसरोवर, होकर प्राचीन तालाब व गणगौर तालाब को भरता था। वहां से पानी मेवाड़ हॉस्पिटल के पास से बहता हुआ आयड़ नदी में गिरता था। इसी तरह सापेटिया मुख्य रोड पर श्मशान से होते हुए बीजी नगर, भिक्षुनगर से आने वाली पुरानी नहर मानसरोवर में मिलकर आयड़ नदी में मिलती थी, लेकिन वहां पर नहर ही गायब हो गई।
चारों तरफ कब्जे ही कब्जे
पुरानी शिकारवाड़ी के सामने कृषि भूमि से लगती नहर को पाटकर उसके ऊपर कई निर्माण कर दिए गए। सापेटिया बेदला रोड सिंघवी ऑयल मिल तिराहे के सामने भराव डालकर नाले को पाटकर रास्ता निकालने की तैयारी की जा रही है। इसी तरह बीजी नगर भिक्षुनगर, मानसरोवर में कई स्थानों पर नहर की चौड़ाई कम कर उस पर मकान की दीवारें बना दी। कई स्थान पर नाले को नाली बना दिया गया।
पहले घर के बाहर ही करीब 12 से 15 फीट नहर में पानी चलता था। तीन- चार साल पहले इस नहर के पानी से ही आसपास के खेतों में पिलाई होती थी, लेकिन इस नहर को आगे से ही लोगों ने भराव डालकर पाट दिया इससे यहां पानी आना बंद हो गया।
- धन्नाजी डांगी, बेदला निवासी
तालाब पेटे को पाटकर भर दिया भराव, रूपसागर में बन गए मकान
भुवाणा में डागलियों की मगरी तालाब पर कतिपय लोगों ने भराव डालकर वहां पर दुकानें निकाल दी तथा कई जगह कब्जे कर लिए। यहां पर आसपास के क्षेत्र की पहाड़ियाें का पानी आकर तालाब में गिरता है, लेकिन यहां भी पूरे केचमेंट में लोगों ने जगह-जगह कब्जे कर रखे हैं। इस तालाब में एकत्रित होने वाला पानी अमरचंदिया में होता हुआ बेदला पुलिया में जाता है। यहां से आयड़ नदी में होकर उदयसागर में गिरता है। यहां पर एक तरफ तालाब की पाल है तो दूसरी तरफ आबादी क्षेत्र में लोगों ने मकान बना दिए तो एक साइट में लोगों ने कृषि भूमि पर नियमन करवाते हुए भूखंड काट डाले। अभी भी वहां लगातार कब्जे हो रहे हैं। इस बारे में पूर्व में क्षेत्रवासियों ने कई बाद यूआईटी अधिकारियों को शिकायतें की लेकिन कोई हल नहीं निकला।
बहाव क्षेत्र को बहाल करेंगे
पानी के आवक वाले रास्ते में जहां भी अतिक्रमण है उसे ढहाया जाएगा। बेदला क्षेत्र में यूआइटी ने नाले का निरीक्षण किया है, वहां जिसने भी कब्जा किया है, उन्हें हटाकर पानी के बहाव क्षेत्र को बहाल किया जाएगा।
- ताराचंद मीणा, जिला कलक्टर
अतिक्रमण है तत्काल हटाए
झीलों के जलग्रहण तथा पानी के आवक वाले क्षेत्र में अतिक्रमण है तो उसे तत्काल हटाया जाना चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि निर्माण कार्य के दौरान एक बार क्षेत्र का सर्वे करे ताकि अतिक्रमी को उसी वक्त पाबंद किया जा सके।
- प्रवीण खंडेलवाल, कानूनविद
जलमार्गों पर अतिक्रमण
जलप्रवाह मार्ग में किसी तरह का अवरोध खड़ा करना गैरकानूनी है। हाइकोर्ट ने भी इस पर रोक लगा रखी है। शहर की झीलों के जलमार्गो पर अतिक्रमण है तो इसकी जिम्मेदार जिला कलक्टर व जलसंसाधन विभाग की है।
- अनिल मेहता, झीलप्रेमी
रूपसागर पेटे में मकान
रूपसागर तालाब पेटे में अधिकांश लोगों ने मकान बनाते हुए उसे छोटा कर दिया। यहां पर प्रशासन ने तालाब पेटे की जमीन पर डिमार्केशन करते हुए निशान भी लगाए, लेकिन वहां पर मिलीभगत से मकान बन गए। इस तालाब की हालत ऐसी हो गई कि यहां पर नालों में बहकर आने वाला पानी अब बंद हो गया। आसपास के क्षेत्र की सिर्फ नालियां इसमें छोड़ रखी है। इस तालाब का पानी बेकनी पुलिया होकर आयड़ नदी में गिरता है, जो उदयसागर को भरता है।
पत्रिका ने पहल करते हुए पूर्व में रूपसागर तालाब को बचाया था। अभी तालाब पेटे में जहां भी निर्माण हो रहे है उसे रोका जाना चाहिए।
- प्रवीण कुमार, रूपसागर निवासी
Published on:
28 Jun 2022 10:12 am
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