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तवे-सी तपेगी धरती और कहर ढाएगा सूरज, इस बार की गर्मियां कर सकती हैं परेशान, जानिए इसके पीछे की वजह…

जनवरी-फरवरी में 8 पश्चिमी विक्षोभ हुए सक्रिय लेकिन उदयपुर में नहीं हुई मावठ, अब मेवाड़ सहित उदयपुर में गर्मी का अधिक रहेगा असर

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बसंत पंचमी के बाद से ही मौसम बार-बार रंग बदल रहा है। कभी तेज धूप तो कभी बादल छाए रहते हैं। कभी सर्द लहर है तो कभी तेज हवाओं का असर है। इससे कभी सर्दी तो कभी गर्मी का अहसास हो रहा है। दरअसल, मौसम में यह परिवर्तन प्रदेश में सक्रिय होने वाले पश्चिमी विक्षोभों के कारण होता है। इस बार जनवरी और फरवरी में कुल 8 विक्षोभ सक्रिय हुए लेकिन उदयपुर में बारिश नहीं हुई, जबकि जोधपुर, जयपुर, कोटा, अजमेर व अन्य संभागों में अब तक कई बार बारिश तो कई जगह ओलावृष्टि भी हुई है। ऐसे में अब मौसमविदों का अनुमान है कि उदयपुर की गर्मियां परेशान करने वाली हो सकती हैं क्योंकि वातावरण में बिल्कुल भी नमी नहीं है।

फरवरी में होती आई है बारिश

शहर में इस बार फरवरी माह में तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव रहा है। दिन में कई बार गर्मी ने गर्म कपड़े छोड़ने पर मजबूर किया तो कभी फिर से सर्द लहर के कारण लोगों ने गर्म कपड़े पहने। इसका कारण प्रदेश में लगातार पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता बने रहना है। फरवरी माह में लगभग 5 विक्षोभ सक्रिय हो चुके हैं, जबकि जनवरी माह में 3 विक्षोभ सक्रिय हुए थे तब भी उदयपुर में बारिश नहीं हुई। अब 1 मार्च से फिर एक नए पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना है।

फरवरी में सक्रिय हुए विक्षोभ -

पांचवां - 26-27 फरवरी

चौथा - 19-21 फरवरी

तीसरा - 13-14 फरवरी

दूसरा - 3-5 फरवरी

पहला - 1-2 फरवरी

जनवरी में सक्रिय हुए विक्षोभ -

तीसरा - 31 जनवरी

दूसरा - 25 जनवरी

पहला - 8-9 जनवरी

गर्मियों में तापमान उच्च रहेगा

मौसमविद् प्रो. नरपतसिंह राठौड़ के अनुसार इस वर्ष उदयपुर, मेवाड़ एवं वागड़ में जनवरी-फरवरी माह में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय नहीं होने से मावठ (सर्दी की बरसात) नहीं हुई है। इसका प्रमुख कारण इस बार पश्चिमी विक्षोभ बहुत ही कमजोर और ईरान पर पहुंचने पर इन विक्षोभों का विचलन उत्तर एवं उत्तर-पूर्व में पामीर पठार की ओर होने से जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड में जनवरी से लेकर मध्य फरवरी तक बहुत कम बर्फबारी होना है। इस कारण उदयपुर सहित मेवाड़ में मावठ नहीं हुआ है। इस वर्ष अभी तक सर्दी कम पड़ी है। ऐसे में इस बार मेवाड़ में गर्मी का असर ज्यादा होगा। इस वर्ष पूरे भारत में उच्च तापमान रहेगा तो बंगाल की खाङ़ी एवं अरब सागर में बारी-बारी से चक्रवात आएंगे। इन चक्रवातों का असर मेवाड़-वागड़ पर भी होगा।