
ऐसा क्या है कि इस गांव में मवेशियों ने छोड़ दिया है चारा-पानी
उदयपुर/ मेनार. महाराज की खेड़ी, मनवा खेड़ा के बाद मेनार में खुरपका व मुंहपका रोग ने दस्तक दी है। दर्जनों पशु इस रोग की चपेट में हैं। चारा-पानी छोड़ चुके पशुधन को लेकर पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। दुधारू मवेशियों में बढ़ते रोग को लेकर एक ओर पशुपालक जहां परेशान हो रहे हैं। वहीं जिले के विभागीय जिम्मेदार बीमारी को लेकर संजीदा नहीं दिख रहे हैं। समस्या से पशुपालकों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। पैर जमा बीमारी की चपेट में पशुपालक रमेशचंद्र मेनोरिया की दो गाय व दो भैंस के खुरपका रोग होना सामने आया है। बीमारी से दुधारू मवेशियों की दुग्ध उत्पादन क्षमता भी प्रभावित है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक परेशानी का भी मुंह देखना पड़ रहा है। इधर, आलम यह है कि करीब ५ दिनों से बढ़ रही बीमारी को लेकर जिम्मेदार पशुपालन विभाग पूरी तरह बेखबर है। आशंका जताई जा रही है कि फिलहाल 4 पशुओं में सामने आया यह रोग अन्य मवेशियों को भी चपेट में ले सकता है।
बीमारी के लक्षण
खुरपका व मुंहपका बीमारी की चपेट में आए पशु को तेज बुखार, मुंह मसूड़े, जबड़े के अंदर और खुरों के बीच में छोटे-छोटे दाने-छाले उभरने लगते हैं। पशु जुगाली बंद कर देता है। मुंह से लार का गिरना निरंतर जारी रहता है। पीडि़त पशु चारा-पानी कम करता जाता है। सुस्ती भी दिखने लगती है। समय पर उपचार के अभाव में बीमारी अकारण मौत की वजह बन जाती है।
चार मवेशियों को रोग
दो गाय व दो भैंस को खुरपका व मुंहपका रोग हुआ है। सरकारी चिकित्सालय बंद होने के कारण निजी पशु चिकित्सकों से उपचार कराना पड़ रहा है। पहले एक पशु में रोग था अब सब को हो गया है।
हेमु उदावत, पीडि़त पशुपालक
पूरे क्षेत्र में टीकाकरण
मेनार सहित पूरे वल्लभनगर क्षेत्र में टीकाकरण हो चुका है। अब तक मेनार से खुरपका व मुंहपका रोग की सूचना नहीं मिली है। लेकिन, अब जानकारी मिली है तो मंगलवार को टीम भेजकर मवेशियों को उपचार सुविधा मुहैया कराई जाएगी। विभाग बीमारी को लेकर संजीदा है।
डॉ कविता त्यागी, वरिष्ठ मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, पशुचिकित्सालय वल्लभनगर
Published on:
08 Jan 2019 06:00 am
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