
एमजी कॉलेज में कार्य व्यवस्था के तहत शिक्षिका की नियुक्ति कैम्पस में चर्चा का विषय बनी हुई है। संबंधित शिक्षिका को प्राचार्य पद पर पदोन्नत कर सराड़ा लगाया था। सराड़ा कॉलेज में प्राचार्य का पद रिक्त है। बताया जा रहा है कि शिक्षिका के पति के उच्च पद पर होने के कारण महाविद्यालय में नए पद का सृजन कर दिया गया है।
चौंकाने वाली बात यह भी है कि डॉ. ऋतु मथारू को वेतन सराड़ा महाविद्यालय के नाम से ही मिल रहा है। एमजी कॉलेज सेवाएं दे रही ऋतु को पदोन्नत कर सराड़ा लगाया गया था। अब पुन: उन्हें एमजी कॉलेज में नियुक्त कर दिया गया है। गौरतलब है कि सराड़ा में स्टाफ की भारी कमी है। वहीं एमजी प्रदेश का एकमात्र एेसा महाविद्यालय है, जहां तीन-चार पदों को छोड़ कर स्वीकृत सभी पद भरे हुए हैं। यहां प्राचार्य और दो उप प्राचार्य पहले से नियुक्त हैं।
इसलिए उठ रहे सवाल : जहां पहले तकरीबन सभी पद भरे हैं, वहां नई व्यवस्था कर कर्मचारी की नियुक्ति हुई। कार्य व्यवस्थार्थ उस कॉलेज के प्राचार्य को लिया है, जहां अरसे से प्राचार्य का पद रिक्त है। सराड़ा महाविद्यालय के शिक्षक लंबे समय से प्राचार्य सहित दूसरे पदों को भरने की मांग कई बार सरकार से कर चुके हैं। एमजी कॉलेज में एक प्राचार्य और दो उप प्राचार्य पहले से हैं, तो यहां व्यवस्थार्थ एक और नियुक्ति क्यों?
ब्लॉक स्तर पर उच्च शिक्षा बदहाल
गोगुंदा, सलंूबर, लसाडि़या, झाड़ोल, खेरवाड़ा, कोटड़ा में ब्लॉक स्तर पर राजकयी महाविद्यालय तो शुरू कर दिए गए हैं, लेकिन फैकल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति दयनीय है। आदिवासी बहुल गोगुंदा, कोटड़ा, सराड़ा में विषय अध्यापक तक नहीं है। ज्यादातर शिक्षक इन स्थानों पर जाने से बचते हैं। जैसे- तैसे महाविद्यालयों को शिक्षक मिलता है, तो नियुक्त होने वाला कोई न कोई जुगाड़ लगाकर अपना स्थानांतरण शहर में करने का जुगाड़ कर लेता है।
Published on:
20 Apr 2017 10:35 am
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