
गुजरात-महाराष्ट्र में कोविड मरीजों के उपचार मेथिलीन ब्लू का उपयोग यहां क्यों नहीं ?
भुवनेश पंड्या
उदयपुर. बढ़ते कोरोना मरीजों के उपचार को लेकर गुजरात और महाराष्ट्र में मेथिलीन ब्लू दवा का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन अब तक अपने यहां इसकी शुरुआत नहीं की गई है। इसे लेकर फिलहाल कोई स्टडी नहीं है, लेकिन खास तौर पर सूरत व महाराष्ट्र के कुछ चिकित्सालयों में कोरोना मरीजों पर ये दवा इस्तेमाल की गई तो परिणाम बेहतर सामने आए हैं, हालांकि राजस्थान में इस दवा के उपयोग का कोई मामला अभी सामने नहीं आया।
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मेथिलिन ब्लू- जिसे मेथिलथियोनिनियम क्लोराइड भी कहा जाता है, एक दवा और डाई है। यह लिक्विड फोम में होती है। एक दवा के रूप में यह मुख्य रूप से मेटेमोग्लोबिनेमिया के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है। विशेष रूप से इसका उपयोग मेटेमोग्लोबिन के स्तर के इलाज के लिए किया जाता है, जो 30 प्रतिशत से अधिक होते हैं या जिसमें ऑक्सीजन थैरेपी के बावजूद लक्षण होते हैं। इसका पहले साइनाइड विषाक्तता और मूत्र पथ संक्रमण में उपयोग किया गया है, यह आमतौर पर एक नस में इंजेक्शन द्वारा दिया जाता है।
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ऐसे किया उपयोग
- पहली लहर में भावनगर गुजरात के सीनियर पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ दिलीप गोलवालकर ऑप्थल्मोलॉजिस्ट डॉ जगदीश काकडिया व और मुम्बई के ऑप्थल्मोलॉजिस्ट डॉ रमेश शाह ने इस दवा का उपयोग कोरोना मरीजों पर किया। सूरत में करीब पांच हजार मरीजों पर ये दवा इस्तेमाल कर उनका आक्सीजन लेवल बेहतर करने की बात सामने आई थी।
- यह 144 वर्ष पुरानी दवा बताई गई है, जिससे गैस प्वाइजनिंग, कार्बन मोनो ऑक्साइड पोटेशियम साइनाइड लिकेज में ऑक्सीजन लेवल घटने पर दी जाती है।
- बताया गया है कि इससे फेफड़े का फाइब्रोसिस कम होता है।
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ये दुष्प्रभाव भी- आम दुष्प्रभावों में सिरदर्द, उल्टी, भ्रम, सांस की तकलीफ और उच्च रक्तचाप होता हैं। अन्य दुष्प्रभावों में सेरोटोनिन सिंड्रोम, लाल रक्त कोशिका टूटना, और एलर्जी प्रतिक्रियाएं शामिल हैं। गर्भावस्था के दौरान उपयोग बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता है, मेटामोग्लोबिनिया में इसका उपयोग न करने की संभावना अधिक खतरनाक है। मेथिलिन ब्लू एक थियाजिन डाई है।
----मेथिलिन ब्लू को पहली बार हेनरिक कैरो द्वारा 1876 में तैयार किया गया था। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन की आवश्यक दवाओं की सूची, स्वास्थ्य प्रणाली में सबसे प्रभावी और सुरक्षित दवाओं में शामिल है। वाणिज्यिक रूप से उपलब्ध उत्पाद तांबा लाल पाउडर हैं। यह पानी, शराब और नीले रंग में घुल जाता है।
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इसका उपयोग लैब में ब्लड स्लाइड तैयार करने में किया जाता है। इस दवा को स्लाइड पर ड्रोप डालकर इस्तेमाल करते हैं, ये एक डाई होती है। अभी तक केवल ये जानकारी मिली है कि इसका उपयोग कोरोना के उपचार में किया जा रहा है, लेकिन अपने यहां नहीं किया गया है, इसक उपयोग नाक के जरिए किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि इस पर अभी तक कोई स्थाई स्टडी नहीं है।
डॉ महेश दवे, वरिष्ठ विशेषज्ञ मेडिसीन, आरएनटी मेडिकल कॉलेज उदयपुर
Published on:
09 May 2021 08:57 am
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