24 मार्च 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

World Environment Day : ताजी आबोहवा को लील रहा क्रंकीट का जंगल, उदयपुर में नए मास्टर प्लान में हरियाली की अनदेखी

World Environment Day झीलों की नगरी में आबादी बढ़ी, ऑक्सीजन पॉकेट नहीं,

2 min read
Google source verification
udaipur

World Environment Day : ताजी आबोहवा को लील रहा क्रंकीट का जंगल

मुकेश हिंगड़/उदयपुर . हमारे शहर की आबोहवा और प्राकृतिक सौन्दर्य, जो हम देख रहे हैं, वह उदयपुर ? के मास्टर प्लान 1972- 2022 की वजह से है। भले ही हमने 2011-2032 तक का मास्टर प्लान बना दिया है लेकिन पुराने मास्टर प्लान को यह पीछे छोड़ रहा है क्योंकि उस दौर में प्रकृति को बचाने के लिए धरातल पर बहुत कुछ हुआ। इस मास्टर प्लान में हमें बस सीमेंट-क्रंकीट का जंगल मिल रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर शहर में बढ़ रहा प्रदूषण और घट रही हरियाली हमें चिंता का अलर्ट दे रही है। हम बार-बार कहते हैं कि बहुत गर्मी है, जीना मुुुुहाल हो गया है लेकिन हकीकत यह है कि हम सब ने मिल कर शहर की आबोहवा बर्बाद किया है। जनता हो या विकास कार्यों से जुड़ी एजेंसियां सब मास्टर प्लान में सीमेंट और क्रंकीट का जंगल बनाने में ही जुटे हैं।


अब सिर्फ विकास पर ज्यादा फोकस

2011-2032 तक के मास्टर प्लान में पुराने मास्टर प्लान की इन बातों को समायोजित कर रखा है और कुछ पर काम चल रहा है लेकिन अब सारा फोकस शहर में रोड नेटवर्क, एलिवेटेड रोड, ओवरब्रिज, अंडरपास, रिंग रोड, स्मार्ट सिटी के कार्य पर है जबकि विकास से ज्यादा ऑक्सजीन पॉकेट को बढ़ाने पर ध्यान देने और पर्यावरण को बचाने की किसी योजना पर काम नहीं किया जा रहा है। पहले सडक़ों के दोनों तरफ जो हरियाली पहले हुआ करती थी, वह नहीं दिखती है।

READ MORE : PICS: 'अंधेर नगरी-चौपट राजा' ऐसा ही कुछ हो रहा है आजकल उदयपुर में, यकीन ना हो तो देख लीजिए ये तस्वीरें

1972-2022 के मास्टर प्लान में बहुत चिंता थी
- फतहसागर, पिछोला, स्वरूपसागर झील को प्रदूषणमुक्त करना है और मानसी वाकल से पानी लाएंगे ताकि पिछोला, फतहसागर व आयड़ नदी में वर्ष भर स्वच्छ पानी रहेगा।
- उदयपुर शहर की तश्तरीनुमा बसावट को बचाने के लिए पहाडिय़ों पर होने वाले अतिक्रमण को रोकने के लिए नीतिगत निर्णय लेना होगा। ये पहाडिय़ां आरक्षित वन क्षेत्र के रूप में है जो शहर के चारों ओर हरित पट्टी की स्थिति प्रदान करती है।
- आयड़ नदी न केवल झीलों के ओवरफ्लो के बहाव को ले जाती वरन सम्पूर्ण शहर के पानी के बहाव को भी ले जाती है। जल-मल एवं कूड़ा-करकट डालने से नदी प्रदूषित है। पर्यटन की दृष्टि से नदी को नहर के रूप में विकसित किया जाए।
- आयड़ नदी को पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित करना चाहिए। इसके दोनों किनारे पर पौधरोपण तथा हरियाली का विकास करना चाहिए। नदी में वर्ष भर पानी बहता रहे इस योजना को मानसी वाकल योजना के रूप में मूर्त रूप दिया जाए।
- उदयपुर के बेसिन एवं इसके चारों तरफ विरान व नंगी पहाडिय़ों पर घना पौधरोपण करना चाहिए, इससे न केवल नैसर्गिक सौन्दर्य में वृद्धि होगी वरन झीलों में मिट्टी के जमाव की गति में भी कमी आएगी।