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World Music Festival 2018 : माटी बानी और शुभ सरन बैंड ने मचाई धूम, वैश्विक संगीत की सजी महफिल

वल्र्ड म्यूजिक फेस्टिवल का दूसरा दिन - ग्राम्य लोक, सूफीवाद, हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत सहित वैश्विक संगीत की सजी महफिल

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world music festival 2018

उदयपुर . 'कागा सब तन खाइयो, चुन-चुन खाइयो मास, दो नैना मत खाइयो, पिया मिलन की आस...Ó महाकवि बिहारी की पंक्तियों को अपनी वाणी की मिठास में घोल कर निराली कार्तिक ने अपने बैण्ड 'माटी बानीÓ की धुनों पर सुनाकर फतहसागर किनारे बैठे श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। उसके बाद कभी कबीर, तो कभी बुल्लेशाह, तो कभी ठेठ देसी धुनों पर 'अल्ला-ओमÓ की गंूज ने हर किसी के दिलों के तार छेड़ दिए। मौका था उदयपुर वल्र्ड म्यूजिक फेस्टिवल में शनिवार को सजी सांगीतिक दुपहरी का। हिंदुस्तान जिंक, राजस्थान टूरिज्म और वंडर सीमेंट के साझे तथा सहर की संकल्पना में सजे इस संगीत महाकुंभ में माटी बानी और शुभ सरन के बैंड ने संगीत रसिकों को नई-ताजी, ऊर्जावान लहरों से लबरेज कर दिया। माटी बानी समूह के कार्तिक शाह और निराली कार्तिक ने अपने संगीत संग्रह हील द वल्र्ड, बनजारा, रंग रंगैया, मितवा, बावरिया, बलमा, नैना बावरे, फंकी पावा, तोरे मतवारे नैना, ढाई आखर नाम, लेता जाइजो की चुनिंदा संगीत रचनाएं सुनाकर लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

सुर-भावों के निराले स्पेक्ट्रम पर बिखरे उनके संगीत ने ग्राम्य लोक, सूफीवाद, हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत सहित वैश्विक संगीत की विविध शैलियों के शानदार मिश्रण से जादू जगाया। प्रस्तुतियों के दौरान दौरान कार्तिक ने बताया कि उनकी धुनें विश्व संगीत के उदार मिश्रण से बनी हैं। कलाकारों को ही नहीं, बल्कि संस्कृतियों को संगीत के ताने-बाने से आपस में बांधने का मकसद लिए वे झीलों की नगरी में आए हैं। उन्होंने गुजराती व राजस्थानी धुनों व बोल के साथ अंग्रेजी धुनों व शब्दों का ऐसा मिश्रण किया कि दर्शक वाह-वाह कर उठे। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में कबीर के ठेठ सीधे शब्दों की मार मन को छलनी कर गई।

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इससे पहले न्यूयॉर्क के भारतीय गिटारवादक और संगीतकार शुभ सरन ने अपने सात कलाकारों के बैंड जिसमें दो ड्रमर, दो सेक्सोफोन, दो कीबोर्ड व खुद बेस गीटार पर विभिन्न धुनें बजाते हुए लोगों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। शुभ ने आधुनिक, जॉज नव-आत्मा, और शास्त्रीय और समकालीन भारतीय संगीत के साथ रॉक से फ्यूजन की ध्वनियों का संसार रचा। उन्होंने संगीत रसिकों की फरमाइश पर दिल्ली के नाम हैज सुनाकर खूब तालियां बंटोरीं। फेस्टिवल के निदेशक संजीव भार्गव ने बताया कि शनिवार सुबह के सत्र में आमेट की हवेली, अमराई घाट पर फ्रांस, स्पेन और ग्रीस के पेट्राकीस, लोपेज व कैमरिन का ट्रायो व सुभद्रा देसाई ने अपनी प्रस्तुतियों से आगन्तुकों का मन मोह लिया।