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उदयपुर. साल था 1984 का, जब उदयपुर में ब्लैक एंड व्हाइट टीवी आया तो यहां इसे लोगों ने हाथोंहाथ लिया। उस जमाने में टीवी की कीमत 4 से 5 हजार रुपए के बीच थी। लेकिन, ये वो समय था जब लोगों का इसके प्रति एक अलग ही उत्साह था। लोग सिर पर उठा-उठा कर टीवी ले जाते थे। शहर में बापू बाजार स्थित टीवी एंड रेडियो शॉप पर सबसे पहले टीवी बिक्री के लिए लाया गया। उसके बाद धीरे-धीरे इसने हर घर में जगह बना ली। इस दौरान कलर टीवी भी आ चुके थे, लेकिन वे अधिक महंगे होने के कारण लोग उनके बजाय ब्लैक एंड व्हाइट टीवी ही खरीदना पसंद करते थे।
10 मिनट में खाली हो जाती थी टीवी से भरी ट्रकें
शंकर पाहुजा ने बताया कि उनकी बापूबाजार स्थित दुकान की शुरुआत वर्ष 1981 में की थी। वैसे, पिताजी ने ओमप्रकाश ब्रदर्स के नाम से वर्ष 1955 में दुकान शुरू कर दी थी। संयोग से पिताजी का नाम तुलसीराम वेड़वाल था, जो टीवी पाहुजा ही लिखते थे और उन्हीं के नाम से हमने टीवी रेडियोज दुकान की शुरुआत की थी। बाद में जब टीवी आ गए तो दुकान ‘टीवी की दुकान’ के नाम से मशहूर हो गई। 1984-85 में ब्लैक एंड व्हाइट टीवी सबसे पहले हम ही उदयपुर लाए थे। दिल्ली से हमें डिस्ट्रीब्यूटर बनाया गया था। ट्रक की ट्रक आती थी और 10 मिनट में ट्रक खाली हो जाता था। लोग हाथों हाथ टीवी खरीद कर सिर पर ही उठा लेकर जाते थे। तब डायनोरा और वेस्टर्न टीवी नंबर 1 ब्रांड थे व 14 इंच और 20 इंच के टीवी ही बिकते थे। कलर टीवी की कीमत तब 15 से 20 हजार रुपए थी। 1998 के बाद से कलर टीवी की डिमांड बढ़ गई और धीरे-धीरे टीवी का पूरा मार्केट ही बदल गया।
1984 में ही हुई दूरदर्शन रिले केंद्र की शुरुआत
उदयपुर में दूरदर्शन केंद्र के निदेशक रहे रविंद्र डूंगरवाल ने बताया कि जुलाई 1984 में दूरदर्शन रिले केंद्र की स्थापना की गई थी। स्टूडियो सिर्फ जयपुर में है। यहां भी स्टूडियो की योजना और जमीन भी थी लेकिन यहां स्टूडियो नहीं बन पाया। अक्टूबर 2000 से उनका भी जुड़ाव रहा है और ये बहुत अच्छा सफर रहा है। पिछले साल से ही रिले केंद्र बंद किए गए हैं, लेकिन वह समय ही अलग था जब दूरदर्शन का बहुत क्रे ज हुआ करता था।
Published on:
21 Nov 2020 09:30 pm
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