पिता दृष्टिहीन, भाई मूक-बधिर, सिलाई कर मां ने चलाया गुजारा, बेटे को बनाया फुटबॉलर
मधुलिका सिंह/उदयपुर. अभावों से गुजरकर और हालातों से लड़ते हुए जो जिंदगी की मुश्किलों का सामना करता है, वही हीरा बनकर चमकता है। उदयपुर के आदिवासी क्षेत्र डूंगरपुर से ताल्लुक रखने वाले धनंजय दर्जी ऐसे ही अभावों से गुजरकर फुटबॉलर बने हैं। दरअसल, धनंजय के पिता कनकमल दर्जी दृष्टिहीन हैं और भाई मृत्युंजय मूक-बधिर, मां गीता सिलाई करके जैसे-तैसे घर का गुजारा चलाती हैं। ऐसे में उसके पास ना तो खेलने के लिए कभी जूते ही थे और ना ही कोई अन्य जरूरी सामान। इसके बावजूद उसने फुटबॉलर बनने का सपना छोड़ा नहीं। आज उनकी मेहनत का नतीजा है कि वह 2 बार राजस्थान के बेस्ट प्लेयर चुने जा चुके हैं। वहीं, राजस्थान की अंडर 14 टीम का नेशनल टूर्नामेंट में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
कोच गफूर के रूप में मिले Òद्रोणाचार्यÓ
उदयपुर के श्रमजीवी कॉलेज में बीए द्वितीय वर्ष के छात्र धनंजय ने बताया कि उसे बचपन से ही फुटबॉल खेलने का शौक रहा है। लेकिन ना तो उसके पास फुटबॉल की कोचिंग के पैसे थे और ना ही कोई एकेडमी जॉइन करने के लिए। ऐसे में दोस्त के बताने पर वह उदयपुर में फुटबॉल कोच गफूर खान से मिला। गफूर खान ने बताया कि धनंजय का फुटबॉल के प्रति जुनून देखते हुए उसे नि:शुल्क फुटबॉल का प्रशिक्षण देना शुरू किया। वहीं, उसका स्टेप बाय स्टेप स्कूल में प्रवेश कराया। उसकी प्रतिभा को देखते हुए स्कूल ने भी उसकी फीस माफ की। धनंजय अच्छे खेल का प्रदर्शन करते हुए अंडर 14 का बेस्ट प्लेयर बना और उसे 2 बार बेस्ट प्लेयर का अवार्ड मिला। कम उम्र में ही बेंगलूरू की टीम से अंडर 13 और अंडर 15 में आई लीग खेला। इसके बाद आई लीग नेशनल भी खेला।
रीट में पूछा धनंजय को लेकर प्रश्न
राजस्थान के खिलाड़ी धनंजय दर्जी जो हाल ही में खबरों में थे, किस खेल से संबंधित है? ये प्रश्न हाल ही तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा में पूछा गया। एग्जाम पेपर में उसके बारे में सवाल पूछा जाना उसके लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। धनंजय ने बताया कि वह फुटबॉल की दुनिया में लियोनल मैसी की तरह गॉट ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम बनना चाहता है। अभी नेशनल टीम में जगह बनाने के लिए रात-दिन फुटबॉल मैदान में अभ्यास कर रहा है।