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मिसाल हैं हमारे बुजुर्ग, डटे रहे लगातार, लेकिन नहीं मानी हार

गंभीर रूप से बीमार होने के बाद भी महामारी को मात दी है। रामनवमी को जन्मदिन के दिन उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी....

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उज्जैन। ये कहानी उज्जैन निवासी 96 साल की शांतिबाई दुबे और आलीराजपुर जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत नानपुर के 94 वर्षीय सीताराम राठौड़ की है। कोरोना (coronavirus) के चलते शांतिबाई के फेफड़ों में 80 फीसदी तक संक्रमण फैल गया था, जबकि राठौड़ 65 फीसदी संक्रमण की चपेट में थे। दोनों अस्पताल में रहे। डॉक्टरों की बात मानी। तय खान-पान किया और आज दोनों कोरोना को मात दे चुके हैं।

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विचलित नहीं हुईं शांतिबाई

96 साल की शांतिबाई ने गंभीर रूप से बीमार होने के बाद भी महामारी को मात दी है। रामनवमी को जन्मदिन के दिन उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी। नातिन पूजा ने कहा, सागर ( बंडा) की रहने नानी की 4 अप्रेल को उनकी तबियत बिगड़ी थी। पापा सुरेश दीक्षित अस्पताल लेकर गए तीन दिन आइसीयू में रहीं।

सीटी स्कैन में फेफड़ों में 80 प्रतिशत संक्रमण का पता चला। उन्हें ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी। हम उन्हें इंदौर लेकर गए। हम सब घबरा गए, लेकिन नानी ने हिम्मत नहीं हारी। इस दौरान हमारे सामने करीब 30 लोगों की कोरोना से मौत हो गई। फिर भी नानी विचलित नहीं हुईं। आज वे स्वस्थ हैं।

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94 साल के सीताराम राठौड़ ने भी दी मात

94 साल के सीताराम राठौड़ कहते हैं, कोरोना में हिम्मत से काम लेना पड़ेगा, दुःखों के पहाड़ सभी पर टूटते हैं, लेकिन जो डटकर मुकाबला करता है, वह जीत जाता है। उन्होंने बताया, कोरोना होने पर आलीराजपुर ले गए। आठ दिन अस्पताल में उपचार चला। इस बीच मैंने कई लोगों को तड़पते, कराहते देखा, लेकिन खुद हिम्मत रखी । यही वजह है कि आज स्वस्थ हूं।