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नए साल के पहले दिन थ्रीडी तकनीक से देख सकेंगे ग्रहों की चाल

इस महीने के आखिर तक पूरा हो जाएगा तारामंडल के थ्री-डी अपग्रेडेशन का काम

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उज्जैन। टू-डी तकनीक वाले तारामंडल को थ्री-डी में अपग्रेड करने का काम जारी है, जो इस महीने के आखिर तक पूरा हो जाएगा। तारामंडल से जुड़े अधिकारियों का दावा है कि अगले साल के पहले दिन रात जैसे अंधेरे में लोग तारामंडलीय गतिविधियां देख सकेंगे। गौरतलब है कि वर्ष 2013 में निर्मित तारामंडल को उस समय की अत्याधुनिक टू-डी तकनीक में ढाला गया था, जो अब पुरानी हो चली है। अब तो सेवन-डी तक की तकनीक के भी दावे जारी हैं, वहीं हमारे उज्जैन के तारामंडल को थ्री-डी तकनीक से अपडेट किया जा रहा है।

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बता दें कि यहां आने वाले आगंतुकों व शोधकर्ताओं को तारामंडल के प्रवाह को थ्री-डी डोम में देखने की डिमांड भी थी और इसी को लेकर यह अपग्रेडेशन किया जा रहा है। इससे काफी तारामंडलीय गतिविधियों को काफी नजदीक से समझने का मौका मिलेगा। अप्रेल 2022 में शुरू हुए इस अपग्रेडेशन को पूरा होने में पहले चार महीने का समय बताया जा रहा था, लेकिन अब दिसंबर अंत तक काम पूरा होने की उम्मीद है। अपग्रेड होने के बाद उज्जैन का तारामंडल यह देश के अत्याधुनिक तकनीक वाले तारामंडलों में शामिल हो जाएगा। मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के संयुक्त संचालन वाले उज्जैन के तारामंडल में विद्यार्थियों का प्रवेश नि:शुल्क है। जानकारी के मुताबिक जून 2013 से मई 2022 तक इस तारामंडल में लगभग 7 लाख आगंतुक (विजिटर्स) भ्रमण कर चुके हैं, जबकि थ्री-डी होने के बाद विजिटर्स की संख्या डेढ़ से दो गुना बढऩे का दावा हो रहा है।

आकर्षण का केन्द्र होगा तारामंडल

मप्र विज्ञान केंद्र के अधिकारी राजेश शर्मा के अनुसार इसी माह के अंत तक तारामंडल का अपग्रेडेशन हो जाएगा। भगवान महाकालेश्वर और श्री महाकाल लोक के बाद अब उज्जैन में तारामंडल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र हो जाएगा। शर्मा के अनुसार तारामंडल व साइंस सेंटर के साथ इस परिसर में इतनी सुविधाएं होंगी कि सुबह 10 बजे यहां प्रवेश करने वाला विजिटर शाम 4 बजे तक भी यहां का पूरा नजारा नहीं कर सकेंगे।

साढ़े 8 करोड़ से हो रहा अपग्रेड

तारामंडल को टू-डी से थ्री-डी में अपडेट करने पर लगभग 8.5 करोड़ रुपए का खर्च होगा। तकनीक के साथ इसका नवीनीकरण भी हो रहा है।

अब होंगे पांच प्रोजेक्टर

तारामंडल के 12 मीटर वाले डोम में पांच प्रोजेक्टर होंगे, वहीं प्रोजेक्टर के लैंस की फाइन ट्यूनिंग, प्रोजेक्टर फीट होने का डायमेंशन, सिलिंग बदलना, सिविल वर्क आदि भी शामिल है। अपग्रेड होने के बाद थ्री-डी डायमेंशन वाला उज्जैन का तारामंडल प्रदेश का पहला तारामंडल हो जाएगा। निर्माण के समय भवन निर्माण, सड़क निर्माण, बाउंड्रीवाल, कंपोनेंट आदि पर लगभग 12 करोड़ रुपए खर्च हुए थे।