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गांवों में पसरा सन्नाटा, एक साथ जलीं 9 चिताएं

जैसे ही दौलतपुर और सजनखेड़ा गांव लाए गए, दोनों गावों में चारों ओर से चीख-पुकारकी आवाजें सुनाई देने लगीं। एक तरफ शोकाकुल परिवार बदहवास थे, तो वहीं, दूसरी तरफ दोनों गांवों के हर एक सदस्य की आंखें नम थीं।

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गांवों में पसरा सन्नाटा, एक साथ जलीं 9 चिताएं

उज्जैन. राजस्थान के नागौर में हुए सड़क हादसे ने मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के दो गांवों में मातम बिखेर दिया है। हादसे का शिकार होकर जान गवाने वालों के शव बुधवार को जैसे ही दौलतपुर और सजनखेड़ा गांव लाए गए, दोनों गावों में चारों ओर से चीख-पुकारकी आवाजें सुनाई देने लगीं। एक तरफ शोकाकुल परिवार बदहवास थे, तो वहीं, दूसरी तरफ दोनों गांवों के हर एक सदस्य की आंखें नम थीं। अंतिम संस्कार की व्यवस्था पहले से ही की जा चुकी थी। इस दौरान सजनखेड़ा गांव में एक साथ 6 चिताएं जलीं। तो वहीं, दौलतपुर गांव में दौलतपुर में केशर बाई और उसके पति बाबूलाल का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। इसके अलावा, दौलतपुर में एक ही परिवार के तीन तो सजनगढ़ में एक ही परिवार के चार और दो अन्य परिवारों के सदस्यों के शव लाए गए थे। इनके अलावा दो अन्य शवों को आगर और एक को तराना भेजा गया।

आपको बता दें कि, उज्जैन जिले के दौलतपुर और सजनखेड़ा गांव से 40 श्रद्धालु राजस्थान के धार्मिक स्थलों के दर्शन करने निकले थे। ये लोग दो वाहनों पर सवार थे। इसमें से एक तूफान जीप, जिसमें 18 यात्री बैठे थे राजस्थान के नागौर इलाके में मंगलवार सुबह श्रीबालाजी के पास ट्रेलर द्वारा हादसे का शिकार हो गई। ट्रेलर की टक्कर इतनी भीषण थी कि, हादसे में 12 लोगों की मौत हो गई थी। इस दौरान वाहन में मौजूद अन्य 6 यात्री घायल भी हुए, जिनका नागौर में ही इलाज चल रहा है। कलेक्टर मनीष सिंह का कहना है कि, हादसे में घायल हुए लोगों को लेकर भी हम वहां के चिकित्सकों से सीधे संपर्क में हैं। तीन को गंभीर चौटें आईं हैं, लेकिन अब वो खतरे से बाहर हैं। वहीं, अन्य तीन लोगों को मामूली चोटें आईं हैं, जिनका भी निरंतर उपचार किया जा रहा है।

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जैसे ही गांव पहुंचे शव, मच गई चीख पुकार

दुर्घटना में जान गवाने वाले 12 लोगों का राजस्थान में पोस्टमार्टम हुए। इसके बाद मंगलवार शाम को सभी 12 शवों को मध्य प्रदेश के लिये रवाना किया गया। सभी 12 शव बुधवार दोपहर करीब 1 बजे उज्जैन पहुंच गए। यहां से सिलसिलेवार अपने अपने गांवों में पहुंचाया गया। करीब डेढ़ से दो बजे के बीच सभी शव दोनों गांव पहुंच गए थे। एडीशनल एसपी आकाश भूरिया के अनुसार, नागौर जिला अस्पताल से यहां तक का सफर करीब 750 किमी का था। एंबुलेंस वाहनों में शव रखे होने के चलते उन्हें धीरे धीरे ही लाया गया। हालांकि, दोनों गांवों में मृतकों की सूचना पहले ही एक दिन पूर्व ही दी जा चुकी थी, इसलिये मृतकों के परिजन और ग्रामीण पहले ही उनके घरों पर पहुंच चुके थे। इसके अलावा, पुलिस की निगरानी में अंतिम संस्कार की तैयारियां भी पहले से ही कर ली गईं थी।

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