13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बाबा जयगुरुदेव आश्रम में सत्संग से लौट रहे परिवार के साथ हादसा, आधा दर्जन घायल

हादसे में ड्राइवर सहित आधा दर्जन लोग घायल हो गए और एक युवती की मौत हो गई।

2 min read
Google source verification
patrika

jai gurudev ashram,accident,death,wounded,treatment,ujjain news,satsang,

उज्जैन. सोमवार तड़के मक्सी रोड स्थित पंवासा के पास जयगुरुदेव आश्रम में सत्संग के कार्यक्रम से लौट रहे श्रद्धालुओं के ऑटो को कार ने टक्कर मार दी। इससे ऑटो पलट गया। हादसे में ड्राइवर सहित आधा दर्जन लोग घायल हो गए और एक युवती की मौत हो गई। युवती के भाई ने बताया कि हादसे के बाद आसपास के लोग घरों से निकल आए थे, लेकिन मदद करने को कोई आगे नहीं आया। इस कारण इलाज में देरी हो गई और उसकी बहन की जान चली गई।

आश्रम में तीन दिवसीय नामदान, संत्सग

पिंगलेश्वर स्थित बाबा जयगुरुदेव आश्रम में तीन दिवसीय नामदान, संत्सग और भंडारे का वार्षिक कार्यक्रम का रविवार को समापन हुआ। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश से आए लोग सोमवार तड़के 4 बजे घर लौटने के लिए आश्रम से ऑटो (एमपी 13 आर 1362) में रेलवे स्टेशन के लिए रवाना हुए थे। तभी पंवासा टर्न पर सामने से आ रही अनियंत्रित स्विफ्ट कार ( एमपी 09 सीडी 3107) के चालक ने ऑटो में टक्कर मार दी। दुर्घटना में ऑटो पलट गया और उसके ड्राइवर सलमान पिता नासिर निवासी गांधी नगर सहित जतन पिता सीधा केवट निवासी आजमगढ़, राजू (१६) पिता रामसुंदर निवासी अंबेडकर नगर, मीना (४०) पति रामसुंदर निवासी अंबेडकर नगर, तीजाबाई (७०) पति महेश निवासी आजमगढ़, पुष्पा (१४) पिता रामपलक निवासी आजमगढ़, आशा (४५) पति रमेश निवासी अंबेडकर नगर घायल हो गए। वहीं २१ वर्षीय युवती कमलेश पिता रामसुंदर निवासी अंबेडकर नगर की मौके पर ही मौत हो गई। दुर्घटना के बाद कार चालक वाहन छोड़कर भाग गया। सूचना मिलने पर पुलिस व एंबुलेंस ने मौके पर पहुंचकर घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया। ड्यूटी डॉक्टर ने कमलेश की जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। सुबह करीब १० बजे युवती का शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया।

समय पर मिलता उपचार तो बच सकती थी जान
घायल राजू ने बताया कि भीषण दुर्घटना और शोर के बावजूद क्षेत्र के रहवासी मदद के लिए नहीं आए। दुर्घटना के बाद कमलेश करीब २० मिनट तक लहुलूहान हालत में तड़पती रही। यदि उसे समय पर उपचार मिल जाता तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी। क्षेत्र के रहवासी तमाशबीन बने रहे, जबकि राह से गुजर रहे वाहन चालकों ने पुलिस व एंबुलेंस को फ ोन लगाया तब कहीं जाकर अस्पताल पहुंच पाए।

सभी लोग घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाएं, पुलिस नहीं करेगी परेशान
सड़क हादसों में घायलों की कई बार इलाज मिलने में देरी के कारण मौत हो जाती है। इसका प्रमुख कारण उनका समय पर अस्पताल नहीं पहुंचना होता है। हादसे के समय लोग सोचते हैं कि घायल को अस्पताल ले गए तो पुलिस बेवजह के सवाल करेगी और रोककर रखेगी। इस झंझट से बचने के लिए कई लोग घायलों की मदद नहीं करते। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं कि घायलों को अस्पताल पहुंचाने वाले से पुलिस अनावश्यक पूछताछ नहीं कर सकती। सिर्फ उसका पता नोट करने के बाद उसे जाने दिया जाएगा। साथ ही घायल के उपचार से पहले अस्पताल को किसी भी तरह से पुलिस की अनुमति की जरूरत नहीं होगी। अस्पताल प्रबंधन इलाज शुरू करने के बाद पुलिस को सूचना दे सकेंगे। ऐसे में लोगों को चाहिए कि अगर उनके सामने कोई हादसा होता है तो घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में ले जाएं और उसकी जान बचाएं।