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उज्जैन। बुधवार सुबह आगर रोड स्थित आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही के कारण आईसीयू में भर्ती मरीज की ऑक्सीजन मास्क में आग लगने से मौत हो गई। मरीज को यहां उल्टी-दस्त के उपचार के लिए भर्ती किया था, जहां तबीयत बिगडऩे पर उसे शॉक दिए गिए, जिससे होने वाले शार्ट सर्किट से ऑक्सीजन मास्क में आग की लपटें उठने लगीं। यह देख वहां थोड़ी देर के लिए अफरा-तफरी जैसा माहौल हो गया।
मरीज की मौके पर ही मौत, परिजन ने किया हंगामा
लपटों से मरीज का चेहरा, गर्दन और छाती पूरी तरह झुलस गए। हादसे में उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इधर, मरीज की मौत से गुस्साए परिजनों ने हंगामा खड़ा कर दिया। जिसकी सूचना पर चिमनगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को समझाकर थाने ले आई।
लापरवाही का लगाया आरोप
परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के चलते मौत होना बताया है। मामले में फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए इन्दौर एमवाय अस्पताल भेजा है। जहां गुरुवार सुबह पीएम होगा। पुलिस के अनुसार शार्ट पीएम रिपोर्ट और जांच के बाद ही अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ प्रकरण दर्ज होगा।
कौन था मरीज
एसआई राजेन्द्र इंगले के अनुसार भगवतीप्रसाद (४०) पिता कन्हैयालाल निवासी मुल्लापुरा को २८ मई को उल्टी-दस्त होने पर आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती किया गया था। बुधवार सुबह भगवती प्रसाद की तबीयत बिगडऩे लगी, डॉक्टर व नर्स छाती पर शॉक दे रहे थे। इसी दौरान ऑक्सीजन मास्क में आग लग गई। मृतक के भाई हरिप्रसाद ने बताया मास्क में आग लगने से भगवती का चेहरा, दाढ़ी, गर्दन और छाती झुलस गए। जब आग की लपटें ऑक्सीजन मास्क से उठने लगीं तो वार्ड में तैनात स्टाफ इधर-उधर भागने लगे। हरिप्रसाद ने बताया कि उन्होंने दौड़कर भाई के चहरे पर कंबल डाला। हालांकि तब तक मरीज ने दम तोड़ दिया था।
इन्दौर में होगा पीएम
सुबह ९ बजे हुए हादसे के बाद दोपहर १.३० बजे शव को पीएम के लिए जिला अस्पताल लाया गया। यहां अस्पताल प्रबंधन ने फोरंेसिक टीम के नहीं होने से उसके शव को इन्दौर एमवायएच भेजा है। दोपहर बाद ४ बजे के लगभग चिमनगंज थाना पुलिस शव को इन्दौर लेकर पहुंची। जहां शाम होने पर पीएम नहीं हो सका, अब गुरुवार सुबह पीएम होगा।
डिफ्रेलेटर मशीन के पेड में जैली नहीं होने से लग सकती है आग
जिला अस्पताल के एमडी डॉ. जितेन्द्र शर्मा के अनुसार मरीज की धड़कनें बंद होने पर कार्डियो पल्मोनरी रेस्क्यूएशन (सीपीआर), डिफ्रेलेटर मशीन से दिया जाता है इस दौरान अगर मशीन के पेड पर पर्याप्त जैल नहीं लगा हो, तो आग लग सकती है। कई बार मशीन के वायर भी खुले रह सकते हैं, इससे भी आग लगने की संभावना बढ़ जाती है। इसके लिए डॉक्टरों व नर्सों को ध्यान रखना चाहिए कि इस प्रक्रिया के दौरान मशीन के पेड और मरीज की छाती पर पर्याप्त जैली लगी हो।
अस्पताल प्रबंधन बोलने को तैयार नहीं
मामले में आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज ने किसी भी तरह के बयान देने और अपने पक्ष को रखने से इनकार किया है। वहीं देर शाम तक अस्पताल के प्रबंधक डॉ. महाडिक को फोन भी लगाया गया, परंतु उन्होंने फोन रिसिव नहीं किया।

Published on:
30 May 2018 08:07 pm
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