उज्जैन पहुंचने पर अटल जी गोपाल मंदिर जाने को कहने लगे। उनका मन था कि हम वहां कार से नहीं बल्कि तांगे से चलें। बंद तांगे से चलेंगे तो कोई कोई नहीं देख पाएगा। वहां पहुंचकर उनका मन था कि हम भांग का घोंटा पीयें। उन्होंने मुझे तीन ग्लास भांग का घोंटा लाने को कहा। बोला- उसमें बादाम किशमिश भी डलवा लेना, दो ग्लास मैं पीऊंगा एक ग्लास आप पीना।