
कंस वधोत्सव... देवताओं और राक्षसों के बीच हुआ युद्ध
शाजापुर. शहर की 266 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक परंपरा कंस वधोत्सव कार्यक्रम गुरुवार को धूमधाम से मनाया गया। दानवों का रूप धरकर करीब एक दर्जन से भी अधिक पात्र शहर की सड़कों पर राक्षसी अट्टाहास करते हुए निकले। वहीं एक रथ पर भगवान श्रीकृष्ण, बलराम, धनसुखा, मनसुखा, सुदामा सहित अन्य सखा भी विराजमान हुए। देवता और राक्षसों के बीच हुए वाक्युद्ध का शहरवासियों ने जमकर आनंद उठाया।
रात करीब 8 बजे बालवीर हनुमान मंदिर से देव और दानवों का चल समारोह शुरू हुआ जो कंस चौराहा, मगरिया चौराहा, काछीवाड़ा, बस स्टैंड, नई सड़क होता हुआ आजाद चौक पहुंचा। चल समारोह में तीन रथों पर राक्षस सवार थे। वहीं कुछ राक्षस बने कालाकार पैदल चलते हुए लोगों का मनोरंजन कर रहे थे। दूसरी ओर भगवान श्रीकृष्ण, बलराम सहित अन्य देवों का रूप धरे कलाकार एक रथ में सवार होकर चल समारोह में शामिल हुए। आजाद चौक में देवता और दानवों के बीच जमकर वाक्युद्ध हुआ। जिसमें देवता और दानवों ने वर्तमान मुद्दों को लेकर एक-दूसरे पर कटाक्ष किए। देव-दानवों के आपसी संवाद को देखने और सुनने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और लोगों ने इसका जमकर आनंद लिया। कार्यक्रम के बाद चल समारोह फिर शुरू हुआ जो कंस चौराहे पर पहुंचा। यहां अतिथियों को सम्मानित किया गया। इसके बाद फिर से देव और दानवों के पात्रों के बीच वाक्युद्ध हुआ। इसमें पराजित होने के बाद दानवों का रूप धरे कलाकार यहां से हट गए। रात 12 बजे श्री कृष्ण, बलराम सहित अन्य ने कंस चौराहा पर बनाए गए मंच पर विराजित कंस के पुतले का पूजन कर मंच से नीचे पटक दिया। पुतले के नीचे आते ही गवली समाज के लोगों ने उस पर लाठियां बरसाना शुरू कर दी। इसके बाद समाजजन पुतले को घसीटते हुए यहां से ले गए।
कंस वधोत्सव समिति संयोजक तुलसीराम भावसार, समिति के अजय उदासी, संजय शर्मा सहित अन्य ने मिलकर आजाद चौक में अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान मंच पर मुख्य रूप से पूर्व विधायक पुरुषोत्तम चंद्रवंशी, समाजसेवी रूपकिशोर नवाब, कांग्रेस नेता आशुतोष शर्मा, पूर्व नपाध्यक्ष प्रदीप चंद्रवंशी, पं. संतोष जोशी सहित अन्य उपस्थित रहे। कार्यक्रक्रम का संचालन रामचंद्र भावसार ने किया।
देखने उमड़ी भीड़
शाजापुर में पिछले 266 वर्षों से चली आ रही इस ऐतिहासिक परंपरा को देखने के लिए शहर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होकर पहले चौक बाजार और फिर सोमवारिया बाजार पहुंचे थे।
अयोध्या मामले के संभावित फैसले को देखते हुए जिलेभर में कलेक्टर द्वारा धारा 144 लगाई गई है। ऐसे में कंस वधोत्सव कार्यक्रम के दौरान राक्षसों का रूप धरे कलाकार सांकेतिक रूप से नकली तलवार लिए हुए थे।
हम सब भारत की
संतान हैं और अयोध्या का जो भी फैसला हो उसका सम्मान करेंगे
भारत देश हमारा है, हम सब इसकी संतान हैं, अयोध्या में जो भी फैसला आए सभी को उस फैसले का करना सम्मान है। कुछ इसी तरह के शांति, सौहार्द और आपसी सद्भाव के संवाद आजाद चौक में सुनाई दिए। आजाद चौक में देव और दानवों के बीच हुए वाक युद्ध में रात करीब 10 बजे स्थानीय आजाद चौक में देव और दानव का रूप धरे कलाकारों ने एक दूसरे पर जमकर शब्द बाण छोड़े। करीब 1 घंटे संवाद का यहां बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने आनंद लिया। इसके बाद यहां से शोभायात्रा दोबारा शुरू हुई जो कि सोमवारिया बाजार पहुंची। जहां रात 12 बजे भगवान श्री कृष्ण ने कंस के पुतले का पूजन कर उसे मंच से नीचे पटका और गवली समाज पुतले को लाठी से पीटते हुए ले गए।
संतान हैं और अयोध्या का जो भी फैसला हो उसका सम्मान करेंगे
भारत देश हमारा है, हम सब इसकी संतान हैं, अयोध्या में जो भी फैसला आए सभी को उस फैसले का करना सम्मान है। कुछ इसी तरह के शांति, सौहार्द और आपसी सद्भाव के संवाद आजाद चौक में सुनाई दिए। आजाद चौक में देव और दानवों के बीच हुए वाक युद्ध में रात करीब 10 बजे स्थानीय आजाद चौक में देव और दानव का रूप धरे कलाकारों ने एक दूसरे पर जमकर शब्द बाण छोड़े। करीब 1 घंटे संवाद का यहां बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने आनंद लिया। इसके बाद यहां से शोभायात्रा दोबारा शुरू हुई जो कि सोमवारिया बाजार पहुंची। जहां रात 12 बजे भगवान श्री कृष्ण ने कंस के पुतले का पूजन कर उसे मंच से नीचे पटका और गवली समाज पुतले को लाठी से पीटते हुए ले गए।
Published on:
08 Nov 2019 12:35 am
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