
उज्जैन. साल 2020 के बाद इसबार भी बाबा महाकाल की सवारी के इतिहास में नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। वजह है कोरोना संक्रमण के चलते बदली व्यवस्था। कोरोना के चलते सवारी के लिए छोटे मार्ग पर विचार किया जा रहा है। वही दूसरी ओर महाकालेश्वर ज्योतिलिंग मंदिर के आसपास चल रहे निर्माण कार्य के कारण पारंपरिक मुख्य द्वार शहनाई द्वार पर खुदाई हो रही है।
साल 2021 में बाबा की पालकी नए द्वार से निकालने पर विचार चल रहा है। हालांकि 2020 तक बाबा महाकाल की पालकी शहनाई द्वार से नगर भ्रमण के लिए निकलती रही है। वही कोरोना संक्रमण के चलते पिछले साल भी सवारी पारंपरिक मार्ग की बजाय नए छोटे मार्ग से निकाली गई थी।
पहली सवारी 26 जुलाई सोमवार को
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में सावन मास शुरु होते ही पूरी व्यवस्था बदल जाएगी। 25 जुलाई से सावन मास आरंभ होगा, दूसरे दिन 26 को राजाधिराज बाबा महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने भ्रमण पर निकलेंगे। मंदिर में सावन मास को लेकर तैयारी पूरी हो गई है। कलेक्टर ने नंदी हॉल और गर्भगृह में आम व खास सभी के लिए प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसलिए भक्तों को ऑनलाइन ही दर्शन गकरने होंगे। इस बार बाबा महाकाल की सात सवारी सावन और भाद्र माह में निकलेगी।
रात 2.30 बजे खुलेंगे पट
श्रावण-भादौ मास में महाकाल मंदिर के पट रात 2.30 बजे खुलेंगे। उनकी एक झलक पाने देशभर से भक्त भगवान महाकाल के दरबार में उमड़ते हैं। परंपरानुसार श्रावण मास में भगवान महाकाल की हर सोमवार को सवारी निकलती है, इस बार कुल सात सवारियां निकाली जाएंगी। भस्म आरती भी निर्धारित समय से दो घंटे पहले शुरू होती है।
Published on:
23 Jul 2021 12:39 pm
बड़ी खबरें
View Allउज्जैन
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
