
ट्रैफिक से नहीं निकल पाई एंबुलेंस, जाम के बीच हुआ बच्चे का जन्म
उज्जैन. प्रदेश में लगातार बढ़ रहे टै्रफिक जाम के कारण लोगों को भी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, कई बार लोग ट्रैफिक जाम की वजह से दर्द से तड़पते रहते हैं, तो कई बार समय पर अस्पताल नहीं पहुंचने के कारण लोग रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं, ऐसा ही एक मामला मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर से आया है, जहां ट्रैफिक जाम होने के कारण एंबुलेंस अस्पताल तक नहीं पहुंच पाई और ट्रैफिक जाम में ही बच्चे का जन्म हो गया।
घट्टिया से गर्भवती को ला रही एक एम्बुलेंस अस्पताल पहुंचने से पहले ट्रैफिक जाम में फंस गई। इससे गर्भवती समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाई और बीच रास्ते में ही उसने एम्बुलेंस में बच्ची को जन्म दे दिया। अस्पताल पहुंचने पर भी एम्बुलेंस को अंदर आने के लिए जगह नहीं मिली और करीब सात मिनट सड़क पर ही खड़ा रहना पड़ा। बाद में स्ट्रेचर आने तक महिला को एम्बुलेंस में ही रखा गया। गनीमत रही कि सुरक्षित डिलेवरी हो गई।
ग्राम कचनारिया निवासी 30 वर्षीय गर्भवती रामकन्या को दर्द उठने पर घट्टिया के शासकीय अस्पताल लाया गया था। एनिमिया (हिमोग्लोबिन 8.1) होने के चलते महिला को उज्जैन रैफर कर दिया गया। महिला को उज्जैन लाने के दौरान एम्बुलेंस 108 कोयला फाटक पर ट्रैफिक जाम में फंस गईं। एम्बुलेंस कुछ मिनट यहीं जाम में सड़क पर खड़ी रही और अस्पताल से चंद मिटर दूर 108 में ही डिलीवरी हो गई। प्रसूता के साथ परिवार की एक अन्य महिला व स्वास्थ्यकर्मी मौजूद था।
अस्पताल में आने के लिए एम्बुलेंस को जगह नहीं
दोपहर करीब 1.20 बजे वाहन में ही डिलेवरी के बाद जब एम्बुलेंस प्रसूता व नवजात बच्ची को लेकर चरक अस्पताल पहुंची तो यहां भी अव्यवस्था का शिकार होना पड़ा। अस्पताल के मुख्य द्वार पर हाइड्रोलिक वाहन खड़ा कर लाइट सुधार का कार्य किया जा रहा था। इससे एम्बुलेंस को अंदर जाने की जगह नहीं मिली। मजबूरी में चालक को अस्पताल के बाहर सड़क पर ही एम्बुलेंस खड़ी रखना पड़ी। इस दौरान प्रसूता व नवजात भी बिना किसी चिकित्सक के एम्बुलेंस में ही थे। करीब सात मिनट तक एम्बुलेंस महिला व बच्ची को लेकर बाहर खड़ी रही।
इमरजेंसी में भी नहीं खोला दरवाजा
अस्पताल परिसर में एम्बुलेंस लाने के लिए दूसरा दरवाजा भी है जिसका उपयोग आपात स्थिति में किया जाता है। मुख्य द्वार से एम्बुलेंस को अस्पताल परिसर में आने की जगह नहीं मिलने पर चालक ने सायरन चालू किया। इसके बावजूद किसी ने स्थिति की गंभीरता नहीं समझी। एम्बुलेंस में मौजूद स्वास्थ्यकर्मी ने हाइड्रोलिक वाहन हटाने का कहा लेकिन कुछ मिनट में काम पूरा होने का कह वाहन नहीं हटाया गया। इसके बाद स्वास्थ्यकर्मी ने दूसरे दरवाजे की चाबी के लिए सुरक्षाकर्मी को यहां-वहां तलाश किया। जब तक सुरक्षाकर्मी से संपर्क हुआ, तब तक हाइड्रोलिक वाहन हट चुका था।
इलाज मिलने में भी हुई काफी देर
एम्बुलेंस के अस्पताल परिसर में आने के बाद एक महिला स्वास्थ्यकर्मी ने ताबड़तोड़ फोन लगाकर नर्स को एम्बुलेंस में डिलेवरी होने की सूचना दी। एम्बुलेंस के आसपास कई पुरुष जमा थे जिन्हें पहले मौके से हटाया गया। इसके बाद नर्स ने एम्बुलेंस पर पहुंच नवजात को अलग कर जरूरी उपचार शुरू किया। परिजन नवजात को वार्ड में ले गए। तब भी प्रसूता एम्बुलेंस में ही थी। करीब 10 मिनट बाद स्ट्रेचर आने पर प्रसूता को एमरजेंसी में ले जाया गया।
Published on:
05 Nov 2022 12:03 pm
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