
कमाई की चिंता है, लेकिन सुरक्षा की नहीं
नागदा. सालाना हजारों करोड़ रुपये का कारोबार करने वाले नागदा शहर में बैंकों की सुरक्षा तिजौरी में कैद है। उन्हेल में दिनदहाड़े 15 लाख रुपए की असफल लूट से साबित हो गया है कि बैंकों को कमाई की चिंता है, लेकिन सुरक्षा की नहीं। यदि उन्हेल में बैंक का अपना शस्त्रधारी गार्ड होता तो शायद व्यापारी को दौड़ नहीं लगाना पड़ती। व्यापारी की हिम्मत से लूटेरे सफल नहीं हो पाए। नागदा व उन्हेल तहसील में 30 से अधिक बैंक शाखा हैं। इनका सालाना कारोबार 5 हजार करोड़ रुपए है। यानी बैंक ब्याज के रूप में मोटी कमाई कर रहे हैं, लेकिन इसका कुछ हिस्सा सुरक्षा पर खर्च करने में पूरी तरह कंजूसी बरतते हैं। एक दर्जन से अधिक बैंक शाखाओं के पास अपने गार्ड नहीं हैं। इनमें कुछ बैंक शाखा देहात में हैं। इधर शहर में 20 एटीएम हैं। यहां अधिकांश पर सुरक्षा गार्ड के बिना सन्नाटा छाया रहना आम है। साफ है कि शहर में बैंक शाखाओं की सुरक्षा का जिम्मा पुलिस और होमगार्ड पर है। आखिर बैंक जिम्मेदारी क्यों नहीं समझते? दिन छिपने के बाद बैंकों की सुरक्षा पूरी तरह से रामभरोसे है।
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एटीएम के दरवाजे टूटेे, छत भी क्षतिग्रस्त
उन्हेल. नगर में चार वर्ष में बैंक ऑफ बड़ौदा ने नगर सहित ग्रामीण क्षेत्र में कम कर्मचारी होने के बावजूद भी उपभोक्ताओं का विश्वास जीता है और अन्य बैंकों की तुलना में लक्ष्य के करीब है, पर बैंक की सुरक्षा से लेकर व्यवस्थाओं मे घोर
लापरवाही है।
इन सभी बातों का खुलासा दो दिन पूर्व अनाज व्यापारी पारस पिता रमणलाल जैन के 15 लाख रुपए के बैग को छीनने के असफल प्रयास मामले मे बैंक की पोल खुल गई। जब फरियादी व्यापारी ने पुलिस थाने में अपने साथ हुए घटना के लिखित शिकायत थाने मे दर्ज कराई तो पुलिस ने बैंक से सीसीटीवी कैमरे की सीडीआर मांगी। घटना के बाद जब बैंक ने अपने सीसीटीवी कैमरे से घटना पर नजर डाली तो व्यापारी से लेकर जिन दो लाल टी-शर्ट धारियों पर व्यापारी ने आशंका जताई है उनके चेहरे से लेकर संपूर्ण गतिविधि कैमरे में कैद तो हुई, पर एक फीट से लेकर दस फीट तक की दूरी के घटना क्रम को बैंक के कैमरे स्पष्ट नहीं कर पा रहे है। इसी के चलते पत्रिका ने घटना वाले दिन से ही बैंक ऑफ बड़ौदा के कैमरे हो चले है खराब को फोकस किया है। इसकी पुष्टि टीआइ विपिन बाथम ने भी की है।
बैंक प्रबंधक ने नवीन सीसीटीवी कैमरे के साथ सुरक्षा गार्ड रखने के लिए पत्र लिखकर अपनी जवाबदारी से मुक्ति पा ली हैै, पर व्यवस्था को सुधारने का संतोषप्रद जवाब नहीं दे पा रहे है। इसी मामले के बाद पत्रिका की टीम ने पड़ताल की तो बैंक के साथ उनके उपभोक्ताओं को सुविधा देने वाला एटीएम कक्ष की भी पोल खुल गई। एटीएम मशीन के भी एक माह में दो बार खराब होना तथा एटीएम में लगे कैमरे एक से दो फीट की घटना को भी स्पष्ट रूप से कैमरे में कैद नहीं कर रहे है। एटीएम का मुख्य द्वार भी टूट चुका है। दरवाजे में लगे कांच बिखरना शुरू हो गए है। बैंक ने एटीएम में एसी को सुविधायुक्त बनाने के लिए एक छत का निर्माण किया था, जो एक उपभोक्ता पर कुछ समय पूर्व गिर भी चुकी है। जब इस मामले में बैंक प्रबंधक बीएल यादव से संपर्क किया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। ड्ड
Published on:
04 Nov 2019 08:03 am
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