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उज्जैन. इंजीनियरिंग कॉलेज से पासआउट आष्टा की भावना बनेगी जैन साध्वी, परिवार ने दी सहर्ष सहमति, गच्छाधिपति ने दिया दीक्षा मुहूर्त , २९ साल की भावना धाड़ीवाल। कम्प्यूटर साइंस ब्रांच में बीई की डिग्री ली। निजी कॉलेज में तीन साल लेक्चरार रहीं। बड़ी कंपनियों में जॉब व अच्छे लड़कों के रिश्ते ठुकराए। सिर्फ इसलिए कि उसका मन रमा था वैराग्य के पथ पर।
आष्टा निवासी ये युवती दीक्षा लेकर अब जैन साध्वी बनेंगी। उज्जैन के खाराकुआं श्वेतांबर जैन मंदिर में चातुर्मास कर रहे गच्छाधिपति आचार्य दौलतगसागर सूरि ने उसके दृढ़ निश्चय व परिवार की सहमति से दीक्षा का मुहूर्त दिया। १४ मार्च २०१८ को भावना सारे भौतिक सुखों व परिवार के रिश्ते-नाते छोड़कर संन्यास जीवन अंगीकार करेंगी।
दीक्षार्थी भावना के आष्टा के अनाज कारोबारी वीरेंद्र धाड़ीवाल की बेटी है। परिवार संयुक्त रूप से रहता है और आर्थिक रूप से संपन्न है। साल २०१० में उज्जैन के शा. इंजीनियरिंग कॉलेज से उसने बीई पास किया। तब उम्र २४ साल थी। इसके बाद कई कंपनियों के जॉब ऑफर मिले, किसी अन्य शहर ना जाते हुए उसने आष्टा के प्रोफेशनल कॉलेज में बतौर फैकल्टी तीन साल सेवा दी। इस बीच शादी के कई रिश्ते आए, लेकिन भावना ने ठान लिया उसे तो दीक्षा लेना है। लिहाजा परिवार ने सहर्ष सहमति दे दी।
साध्वी का सान्निध्य
वैसे भावना की किशोरावस्था से साध्वी बनने की इच्छा थी। उससे कोई शादी के बारे में कहता तो वह यही बात बोलती थी। भाई प्रभात धाड़ीवाल के अनुसार परिवार में धार्मिक व तपस्या का माहौल उसे शुरू से मिला। इससे भी धर्म में उसका अधिक लगाव रहा। साध्वी पद्मलता श्रीजी व पुष्पलताश्रीजी के सान्निध्य में रहकर उससे तय कर लिया कि दीक्षा लेना है। कुछ समय परिवार ने विचार कर रजामंदी दे दी।
आष्टा सेे पहली दीक्षा, सब चकित
श्वेतांबर जैन समाजजनों की मानें तो सीहोर जिले के आष्टा से ये पहली दीक्षा है। संयोग यह भी है कि भावना का दीक्षा महोत्सव भी यहीं होगा, जिसमें कई बड़े साधु-साध्वी पहुुचेंगे। नगर के लोग भी उच्च शिक्षित बिटिया के इस निश्चय से चकित हैं, क्योंकि जैन साध्वी बनना मलतब कई कठोर व जटिल नियमों का पालन। ताउम्र पैदल चलना, चप्पल नहीं, पंखे, एसी, टीवी सहित सभी विलासिताओं का त्याग। सांसारिक रिश्ते नाते खत्म।
Published on:
02 Nov 2017 01:41 pm
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