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उज्जैन। लॉकडाउन में प्री-प्राइमरी, प्राइमरी सहित हाई स्कूल के लिए लगी वर्चुअल क्लास में बच्चों ने भले बहुत कुछ सीखा हो, पर उनके हाथ लगे मोबाइल की आदत शिक्षकों और पैरेंट्स के लिए परेशानी का कारण बन गया है। मोबाइल की यह आदत बच्चों को सर्वांगीण विकास से दूर कर रही है। इसे लेकर जिला शिक्षा विभाग ने स्कूलों में बच्चों के मोबाइल ले जाने पर प्रतिबंध लगाया। क्योंकि शहर के निजी स्कूलों में भी इस तरह के मामले रोजाना सामने आ रहे हैं। पिछले एक माह में शहर के करीब करीब सभी स्कूलों में सैकड़ों बच्चे परिजन से छीपा कर मोबाइल स्कूल ले गए।
गुरुवार को शहर के 20 से ज्यादा स्कूलों में इस तरह की घटना सामने आई। इनमें टीचर व संचालकों ने बच्चों से मोबाइल जब्त कर परिजन को स्कूल बुला फटकार लगाई और बच्चों को मोबाइल से दूर रखने की हिदायत दी। कई स्कूल तो इसको लेकर कक्षाओं में बच्चों को जागरूक करने वाले कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। केंद्रीय विद्यायल के शिक्षक विपुल सिन्हा का कहना है, बच्चों में लॉकडाउन के बाद मोबाइल की आदत पड़ गई। वे अब स्कूल भी मोबाइल लेकर पहुंच रहे हैं। यह बच्चों में बेड हैबिट है जो उनके विकास को रोकेगी। इसके लिए हमारे स्कूल में हम जागरूकता आयोजन चला रहे हैं।
पैरेंट्स को बुला फटकार लगाई
शहर के करीब 20 शासकीय और निजी स्कूलों में गुरुवार को सैकड़ों बच्चे मोबाइल लेकर पहुंच गए। इनके मोबाइल स्कूल टीचर और संचालक ने पकड़ उनके पैरेट्स को स्कूल बुलाया और पालकों के सामने ही बच्चों को फटकार लगा सुझाए हैं कि वे अपने बच्चों से मोबाइल को दूर रखें।
प्राइमरी स्कूल के बच्चे तो मोबाइल को समझ रहे स्कूल
साढ़े चार साल की बच्ची ने 2021 में स्कूल में एडमिशन लिया था, उसकी क्लास वर्चुअल क्लास से शुरू हुई। अब वह मोबाइल को स्कूल समझती है, उसके पिता यशंवत सक्सेना का कहना है कि बच्ची को मोबाइल नहीं दो तो वह स्कूल जाने से मना करती है। उसका कहना होता है कि मोबाइल के बगैर कैसे स्कूल जाऊंगी।
Published on:
05 Aug 2022 02:24 pm
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