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सिटी बस हड़ताल : कुल सात बसें, न मैंटेनेंस, न वेतन के ठिकाने

नाराज चालकों ने मक्सी रोड सिटी बस डिपो में बसें खड़ी कर नारेबाजी की। इस पर निगम प्रशासन ने दूसरे ड्राइवरों को बुलवाकर बस चलवाना चाही तो इन्होंने बस नहीं निकलने दी।

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उज्जैन। वेतन नहीं मिलने व पुराने ठेकेदार द्वारा इपीएफ-इएसआई का रुपया जमा नहीं कराने के विरोध में मंगलवार को सिटी बस के 35 ड्राइवर-कंडक्टरों ने हड़ताल कर दी, जिसके कारण शहरी रूट पर 7 बसों का संचालन थम गया। नाराज चालकों ने मक्सी रोड सिटी बस डिपो में बसें खड़ी कर नारेबाजी की। इस पर निगम प्रशासन ने दूसरे ड्राइवरों को बुलवाकर बस चलवाना चाही तो इन्होंने बस नहीं निकलने दी। बाद में वर्कशॉप प्रभारी ने वेतन दिलाने व अन्य समस्याएं सुलझाने का भरोसा दिया। इस पर नाराज चालक हटे और दूसरे ड्राइवरों ने दोपहर 3 बजे सिटी बसों का संचालन शुरू किया।

35 ड्राइवर-कंडक्टरों के साथ अन्याय

सालों से सिटी बस संचालन से जुड़े 35 ड्राइवर-कंडक्टरों के साथ अन्याय पूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। वे काम तो सिटी बस संचालन का करते हैं, लेकिन निगम आउटसोर्स किंग सिक्यूरिटी कंपनी के जरिए वेतन दिलवाता है। पिछले माह का वेतन 25 जून तक नहीं मिलने व अन्य समस्याओं का निराकरण नहीं होने पर चालकों ने हड़ताल कर दी। दोपहर 1 बजे वर्कशॉप प्रभारी इंजीनियर सुनील जैन मौके पर पहुंचें। उन्होंने वस्तुस्थिति बताई और कुछ घंटों के बाद ही वेतन जारी कराया।

बदली पर काम, गाड़ी कम होने से संकट

सिटी बस संचालन से जुड़े 35 ड्राइवर-कंडक्टर हैं, लेकिन वर्तमान में निगम केवल 7 बसों का ही संचालन करवा रहा है। एेसे में ये चालक आपस में दिन बांटकर बदली पर बस चलाते हैं। इसी मान से इन्हें वेतन मिलता है। बस कम होने से चालकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। लिहाजा उन्होंने खराब बसों को सुधरवाकर ऑन रोड करने की भी मांग रखी।

जो कोर्ट से जीतकर आए, उनसे भी काम

सिटी बस सेवा में रहे 17 ड्राइवर-कंडक्टर कोर्ट से केस जीतकर आए हैं। कोर्ट के निर्देश पर निगम ने इन्हें भी सेवा में रखा हुआ है। कुछ उपनगरीय सिटी बसें चलाते हैं। मौजूदा ड्राइवरों के हड़ताल करने निगम ने इनमें से कुछ को बुलाया और बसों का संचालन शुरू करा दिया। जिसका हड़ताली चालक नितिन पाण्डे, विष्णु बैरागी, राकेश ठाकुर, संजीव ओझा, इश्वर गिरी, राम जायसवाल आदि ने विरोध किया।